Thursday, May 14

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अदालत के आदेश पर शंभू गर्ल्स हॉस्टल खुला, अभिभावकों की उम्मीदें अब भी अधूरी

पटना: जहानाबाद की एक नीट छात्रा की संदिग्ध मौत के लगभग एक महीने बाद, मंगलवार को अदालत के आदेश और पुलिस के निर्देश पर पटना स्थित शंभू गर्ल्स हॉस्टल का मुख्य द्वार फिर से खोला गया। हॉस्टल बंद होने के कारण कई छात्राओं का सामान वहीं छूट गया था। अब छात्राएं अपने परिजनों के साथ हॉस्टल पहुंचीं और अपना सामान वापस ले गईं।

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पुलिस के निगरानी में प्रक्रिया पूरी
जैसे ही पुलिस की गाड़ी हॉस्टल पहुंची, परिसर के बाहर भीड़ जमा हो गई। पुलिस की निगरानी में छात्राओं को हॉस्टल के अंदर ले जाकर उनका सामान लौटाया गया। एक नकाबपोश व्यक्ति ने हॉस्टल का द्वार खोला और प्रशासन की सुविधा में मदद की।

अभिभावकों में निराशा और चिंता
अरवल से आईं एक अभिभावक जतेंद्र कुमार ने बताया कि उनकी बेटी हॉस्टल में पढ़ रही थी। उन्होंने कहा, “हम आज पुलिस के साथ उसका सामान लेने आए थे। अब बच्चों को पढ़ाई के लिए शहर भेजने में डर लगता है।” कई अभिभावक निराश नजर आए और भविष्य को लेकर चिंता जाहिर की।

मामले की पृष्ठभूमि
यह घटना 5-6 जनवरी की रात की है, जब हॉस्टल में रहने वाली नीट छात्रा संदिग्ध परिस्थितियों में बेहोश पाई गई थी। 11 जनवरी को उसकी निजी अस्पताल में चोटों के कारण मृत्यु हो गई। शुरू में पुलिस ने इसे आत्महत्या बताया, लेकिन कमरे से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला।

जांच में खामियां, मामला सीबीआई को सौंपा
शुरुआत में पुलिस ने मामले को साधारण आत्महत्या करार दिया, लेकिन नए तथ्यों के सामने आने के बाद उन्होंने रुख बदला। मामले की जांच संदिग्ध मौत, संभावित दुष्कर्म और हत्या के रूप में की गई। पुलिसिया लापरवाही और जांच में विसंगतियों के कारण छात्रों, नागरिक समाज और राजनीतिक नेताओं ने व्यापक विरोध प्रदर्शन किया। इसके बाद सरकार ने मामले को सीबीआई को सौंपने का ऐलान किया।

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