Tuesday, February 3

उत्तराखंड सरकार ने 83 हिमालयी चोटियां पर्वतारोहियों के लिए खोली, साहसिक पर्यटन को मिलेगा नया मुकाम

देहरादून: देवभूमि उत्तराखंड ने साहसिक पर्यटन को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने के लिए ऐतिहासिक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद (UTDB) ने गढ़वाल और कुमाऊं हिमालय क्षेत्र की 83 प्रमुख पर्वत चोटियों को पर्वतारोहण अभियानों के लिए खोल दिया है।

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खुली गई चोटियों की ऊँचाई 5,700 मीटर से 7,756 मीटर तक है। इनमें कामेट, नंदा देवी ईस्ट, चौखंबा समूह, त्रिशूल समूह, शिवलिंग, सतोपंथ, चंगाबांग, पंचचूली और नीलकंठ जैसी विश्व प्रसिद्ध और चुनौतीपूर्ण चोटियां शामिल हैं। ये शिखर न केवल तकनीकी रूप से कठिन हैं, बल्कि अपने अद्भुत प्राकृतिक सौंदर्य के लिए भी जाने जाते हैं।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा, “हिमालय हमारी पहचान, विरासत और शक्ति है। 83 प्रमुख पर्वत चोटियों को पर्वतारोहण के लिए खोलना साहसिक पर्यटन को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। हमारा उद्देश्य युवाओं को पर्वतारोहण के लिए प्रेरित करना, स्थानीय रोजगार बढ़ाना और पर्यावरण संरक्षण के साथ संतुलित विकास सुनिश्चित करना है।”

राज्य सरकार ने पर्वतारोहियों के लिए कई आर्थिक और प्रक्रियात्मक सहूलियतें भी घोषित की हैं। अब भारतीय पर्वतारोहियों को इन 83 चोटियों पर कोई अभियान शुल्क, कैंपिंग शुल्क या पर्यावरण शुल्क नहीं देना होगा। पहले ये शुल्क भारतीय पर्वतारोहण संघ (IMF) और वन विभाग द्वारा लिया जाता था, जिसे अब राज्य सरकार वहन करेगी।

इसके अलावा, विदेशी पर्वतारोहियों पर पहले लगने वाला राज्य स्तरीय अतिरिक्त शुल्क समाप्त कर दिया गया है। अब उन्हें केवल IMF द्वारा निर्धारित शुल्क ही देना होगा। इससे उत्तराखंड की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आकर्षण क्षमता बढ़ेगी और विदेशी अभियानों की संख्या में भी वृद्धि होगी।

सभी पर्वतारोहण अभियानों के लिए आवेदन अब उत्तराखंड माउंटेनियरिंग परमिशन सिस्टम (UKMPS) के ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से किए जाएंगे। यह प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल, पारदर्शी और समयबद्ध होगी, जिससे अनुमति मिलने में देरी नहीं होगी।

सरकार का उद्देश्य सीमावर्ती और दूरदराज के गांवों में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ाना और स्थानीय लोगों को गाइड, पोर्टर, होमस्टे, परिवहन और अन्य सेवाओं के माध्यम से रोजगार के नए अवसर प्रदान करना है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सभी अभियानों में सुरक्षा मानकों और पर्यावरणीय नियमों का कड़ाई से पालन अनिवार्य होगा। पर्वतारोहियों को “लीव नो ट्रेस” सिद्धांत अपनाना होगा, ताकि हिमालय की नाजुक पारिस्थितिकी सुरक्षित रह सके।

गौरतलब है कि केंद्रीय बजट 2026-27 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में इको-फ्रेंडली माउंटेन ट्रेल्स विकसित करने की घोषणा की है। यह पहल भारत को विश्व स्तरीय ट्रेकिंग और हाइकिंग गंतव्य बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद ने कहा कि देश-विदेश के पर्वतारोहियों का स्वागत करते हुए यह निर्णय देवभूमि की साहसिक विरासत को नई ऊँचाइयों तक ले जाएगा।

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