Saturday, May 30

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मुंबई–पुणे हाई स्पीड रेल कॉरिडोर: 48 मिनट में पूरी होगी यात्रा, आर्थिक गतिविधियों को मिलेगा नया वेग

 

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मुंबई, 2 फरवरी। केंद्रीय बजट 2025–26 में घोषित मुंबई–पुणे हाई स्पीड रेल कॉरिडोर महाराष्ट्र के लिए बड़ी सौगात साबित होने जा रहा है। इस परियोजना के शुरू होने के बाद दोनों शहरों के बीच रेल यात्रा का समय घटकर मात्र 48 मिनट रह जाएगा। वर्तमान में यह दूरी तय करने में लगभग चार घंटे लगते हैं।

 

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि केंद्रीय बजट से राज्य को लगभग एक लाख करोड़ रुपये का लाभ मिलेगा। केंद्रीय करों में महाराष्ट्र की हिस्सेदारी करीब 98,306 करोड़ रुपये होगी, जबकि विभिन्न विकास परियोजनाओं के लिए 12,355 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। हाई स्पीड रेल कॉरिडोर इसी विकास दृष्टि का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

 

प्रस्तावित बुलेट ट्रेन की संभावित रफ्तार 300 से 320 किलोमीटर प्रति घंटा होगी। रोजाना बड़ी संख्या में लोग मुंबई और पुणे के बीच आवागमन करते हैं। हाई स्पीड ट्रेन शुरू होने से यात्रियों को भारी राहत मिलेगी और यात्रा उतने ही समय में पूरी होगी, जितना समय बोरीवली से चर्चगेट पहुंचने में लगता है।

 

उद्योग और शिक्षा क्षेत्र को मिलेगा लाभ

 

इस कॉरिडोर से मुंबई–पुणे–हैदराबाद औद्योगिक पट्टी को नई गति मिलने की उम्मीद है। आईटी, उद्योग, व्यापार और शिक्षा क्षेत्र को सीधे लाभ होगा। तीनों शहर देश के प्रमुख आर्थिक और तकनीकी केंद्र हैं। तेज और विश्वसनीय कनेक्टिविटी से निवेश बढ़ेगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। साथ ही सड़क और हवाई यातायात पर दबाव भी कम होगा।

 

एक्सप्रेसवे पर रोज 43 हजार वाहन

 

मुंबई–पुणे एक्सप्रेसवे देश के सबसे व्यस्त मार्गों में से एक है, जहां प्रतिदिन औसतन 43 हजार वाहन गुजरते हैं। रेलवे की ओर से रोज सुबह विशेष ट्रेनों का संचालन किया जाता है, जिनमें वंदे भारत भी शामिल है, फिर भी टिकटों की भारी मांग बनी रहती है। हाई स्पीड रेल शुरू होने से मौजूदा रेल और सड़क नेटवर्क पर बोझ कम होगा।

 

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, पुणे से हैदराबाद के बीच यात्रा समय भी घटकर लगभग 1 घंटा 55 मिनट रह जाएगा, जो वर्तमान में 8 से 10 घंटे है।

 

परियोजना की प्रमुख विशेषताएं

 

मुंबई से पुणे की यात्रा एक घंटे से भी कम समय में

ट्रैफिक जाम से राहत

रोजगार के नए अवसरों का सृजन

आईटी, उद्योग, व्यापार और शिक्षा क्षेत्र को लाभ

मौजूदा रेल और सड़क यातायात का भार कम

 

यह परियोजना महाराष्ट्र की आर्थिक संरचना को मजबूत करने के साथ-साथ क्षेत्रीय विकास को नई दिशा देने वाली मानी जा रही है।

 

 

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