Wednesday, June 24

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बिहार में गृह मंत्रालय हमेशा नीतीश कुमार के पास: जानिए कारण और नई कैबिनेट का फॉर्मूला

पटना: बिहार में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की नई सरकार के गठन की कवायद जारी है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार दसवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं। मंत्रिमंडल में कौन-कौन से विभाग किस पार्टी को मिलेंगे और किस नेता को मंत्री बनाया जाएगा, इस पर अभी चर्चा चल रही है। हालांकि एक बात तय है—गृह मंत्रालय हमेशा की तरह नीतीश कुमार के पास ही रहेगा।

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कानून-व्यवस्था पर नियंत्रण रखना चाहते हैं नीतीश

बिहार में मुख्यमंत्री के बाद सबसे अहम मंत्रालय गृह मंत्रालय होता है। इस मंत्रालय के पास राज्य की कानून-व्यवस्था और सुरक्षा मामलों में महत्वपूर्ण नियंत्रण होता है। साल 2005 से बिहार के मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार हर बार इसे अपने पास रखते आए हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि गृह मंत्रालय अपने पास रखने का उद्देश्य राज्य में कानून-व्यवस्था और भ्रष्टाचार पर सीधे नियंत्रण रखना है।

मंत्री पदों के बंटवारे का फॉर्मूला तय

नई कैबिनेट के लिए दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और नीतीश कुमार की बैठक में 6 विधायक पर 1 मंत्री का फॉर्मूला तय हुआ है। इस फॉर्मूले के अनुसार:

  • जेडीयू: 14 मंत्री पद
  • बीजेपी: 15-16 मंत्री पद
  • एलजेपी-रामविलास: 3 मंत्री पद
  • हम पार्टी: 1 मंत्री पद
  • उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी: 1 मंत्री पद

मुख्यमंत्री पद तय होने के बाद पटना में एनडीए विधायक दल की बैठक होगी, जिसमें जेडीयू विधायक नीतीश कुमार के नाम का प्रस्ताव रखेंगे। एनडीए के अन्य दलों द्वारा इसका समर्थन किया जाएगा।

विधानसभा अध्यक्ष पद पर अभी विवाद

सूत्रों के अनुसार विधानसभा अध्यक्ष और गृह मंत्रालय को लेकर अभी तक पूर्ण सहमति नहीं बनी है।

  • बीजेपी अध्यक्ष पद और गृह मंत्रालय चाहती है।
  • जेडीयू इस बार अध्यक्ष पद पर दावा कर रही है, क्योंकि विधान परिषद में सभापति का पद पहले से बीजेपी के पास है।
  • निवर्तमान विधानसभा में बीजेपी नेता नंद किशोर यादव स्पीकर और जेडीयू के नरेंद्र नारायण यादव डिप्टी स्पीकर थे।

नई एनडीए सरकार को अंतिम रूप देने के लिए दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ जेडीयू और बीजेपी नेताओं की गहन बैठकें चल रही हैं। इस बैठक में स्पीकर के पद और प्रमुख मंत्रालयों के आवंटन पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

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