
अभिनेता, मोटिवेशनल स्पीकर और स्टोरीटेलर आशीष विद्यार्थी शब्दों के जादूगर हैं। 60 साल की उम्र पार करने के बावजूद उनकी ऊर्जा और उत्साह किसी युवा से कम नहीं। आशीष कहते हैं कि जिंदगी में जादू तब होता है जब हम कुछ नया करने की चाह रखते हैं।
जिंदगी में जादू
“मैंने कई बार जिंदगी में जादू महसूस किया है। जब तक जिंदगी है, तब तक बड़े लक्ष्य हासिल करने की गुंजाइश रहती है। हार तब तक नहीं होती जब तक हम हार मान न लें। जब तक कुछ नया करने की आस बाकी है, जिंदगी में जादू चलता रहता है।”
उन्होंने अपने करियर की शुरुआत फिल्म ‘कुत्ते की मौत’ से की थी, जो रिलीज नहीं हुई। उस समय वह टूट गए थे, लेकिन फिर नए अवसरों के लिए तैयार हो गए। आज उन्होंने 11 भाषाओं में 350 से अधिक फिल्मों में काम किया है और हीरो बनने के बजाय विलेन बनकर दर्शकों का दिल जीता।
उम्र सिर्फ एक नंबर है
आशीष का मानना है कि उम्र सिर्फ एक नंबर है। साइंस ने भी यह सिद्ध कर दिया है कि हमारी असली उम्र हमारी बायोलॉजिकल उम्र से अलग हो सकती है। 60 पार करने के बावजूद उनकी एनर्जी और उत्साह किसी युवा से कम नहीं।
सपनों का पीछा और परिवार का समर्थन
उन्होंने बताया कि माता-पिता ने हमेशा उनका समर्थन किया और हौसला बढ़ाया। दिल्ली से मुंबई आकर फिल्मों में करियर बनाने का सफर आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। परिवार और संस्कारों का साथ उनके लिए हमेशा सहारा रहा।
‘जरा-सा और’ की मानसिकता
आशीष कहते हैं, “जब भी थकान महसूस होती है, मैं खुद से कहता हूं – बस, जरा-सा और! यही मानसिकता मुझे हर काम में जोश और लगन से आगे बढ़ाती है।”
मल्टीटैलेंटेड शख्सियत
60 के बाद भी आशीष एक्टिंग के साथ-साथ ट्रैवल व्लॉग, फूड व्लॉग, मोटिवेशनल स्पीच और स्टोरीटेलिंग कर रहे हैं। उनके अनुसार, इंसान में छिपी ऊर्जा का सही इस्तेमाल करना जरूरी है।
बातूनी होना भी एक कला है
बचपन से बातूनी रहने की आदत ने उनके करियर और जीवन में काम किया। लोग उन्हें अब ‘स्टोरीबाज आशीष विद्यार्थी’ के नाम से जानते हैं। उनके शब्द और कहानियां दर्शकों के दिल को छू रही हैं।
आशीष विद्यार्थी की यह कहानी साबित करती है कि उम्र केवल आंकड़ा है, उत्साह और जुनून कभी कम नहीं होता।