
लखनऊ: जनरल कैटेगरी से जुड़े यूजीसी के नए कानून को लेकर समाज में चल रही विवादास्पद प्रतिक्रियाओं के बीच लोकगायिका नेहा सिंह राठौर ने स्पष्ट समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि जातिगत भेदभाव और पक्षपात हमारे समाज की पुरानी बीमारी हैं, और इसे रोकने वाले कानून का विरोध केवल उन लोगों द्वारा किया जा रहा है, जो अपने अवैध विशेषाधिकार खोने के डर से असहज हैं।
अपने सोशल मीडिया हैंडल पर नेहा सिंह राठौर ने ढाई मिनट का वीडियो साझा करते हुए कहा, “चोरी के खिलाफ कानून बनने से कौन तिलमिलाएगा जो चोर होगा। अत्याचार के खिलाफ कानून से कौन खफा होगा जो अत्याचारी है। भेदभाव रोकने वाले कानून का विरोध केवल वही लोग करेंगे जो भेदभाव करते हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “पुरानी बीमारियों का इलाज कड़वी दवाओं से ही संभव है। एससी-एसटी एक्ट और आरक्षण जैसी नीतियां भी ऐसी ही कड़वी दवाइयां थीं, जिनका भरपूर विरोध हुआ। लेकिन यही कदम समाज में समानता और न्याय सुनिश्चित करते हैं।”
नेहा सिंह राठौर ने विरोध कर रहे लोगों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा, “देश का संविधान बराबर अधिकार के लिए बना है, लेकिन क्या हर नागरिक को बराबर सम्मान मिलता है? कुछ लोग अब भी देशहित से समझौता करने को तैयार हैं, लेकिन जातिगत स्वार्थ के लिए कानून का विरोध करना अनुचित है।”
लोकगायिका ने अपने संदेश को मजबूत करते हुए कहा, “यह कानून देश के हित में बनाया गया है। इसे बनाने में 18-18 घंटे की मेहनत लगी है। इसे सम्मान दें और देश को मजबूत बनाने में सहयोग करें। पहले देश है, जाति और बिरादरी बाद में आती है।”
नेहा सिंह राठौर के इस बयान के बाद यूजीसी नए कानून को लेकर चल रही बहस में नई ऊर्जा आ गई है, जबकि सवर्ण समाज के विरोध और PCS अफसर अलंकार अग्निहोत्री के इस्तीफे के कारण यह विषय और अधिक गर्मा गया है।