
रायपुर/नवा रायपुर। राजधानी रायपुर के पुरखौती मुक्तांगन परिसर में शुक्रवार को रायपुर साहित्य उत्सव 2026 का भव्य उद्घाटन समारोह आयोजित किया गया। मुख्य अतिथि के रूप में राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश उपस्थित थे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने की। समारोह के अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य की 25वीं वर्षगांठ पर कई महत्वपूर्ण पुस्तकों का विमोचन भी किया गया।
उपसभापति हरिवंश ने अपने उद्घाटन भाषण में कहा कि छत्तीसगढ़ी साहित्य की एक समृद्ध और प्राचीन परंपरा रही है, और प्रदेश ने अपनी स्थानीय संस्कृति को सदैव मजबूती से संजोकर रखा है। उन्होंने कहा, “एक पुस्तक और एक लेखक भी दुनिया को बदलने की शक्ति रखते हैं। साहित्य समाज को दिशा देता है, आशा जगाता है, निराशा से उबारता है और जीवन जीने का साहस प्रदान करता है।” उन्होंने राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की कविताओं का उल्लेख करते हुए साहित्य की सामाजिक भूमिका पर जोर दिया।
उपसभापति ने यह भी कहा कि भारत आज दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है और 2047 तक विकसित भारत का संकल्प हमारा राष्ट्रीय लक्ष्य है। स्टील, चावल उत्पादन और स्टार्टअप्स में अग्रणी भूमिका निभाते हुए देश की आत्मनिर्भरता ने दुनिया को नई दिशा दी है। उन्होंने साहित्य की सशक्त भूमिका का भी उल्लेख किया, जो इस राष्ट्रीय शक्ति के पीछे प्रेरक शक्ति बनकर काम करता है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपने संबोधन में कहा कि छत्तीसगढ़ प्रभु श्रीराम का ननिहाल है और इस पावन भूमि पर साहित्य उत्सव का आयोजन गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि इस तीन दिवसीय उत्सव में प्रदेश और देश के विभिन्न राज्यों से 120 से अधिक ख्यातिप्राप्त साहित्यकार भाग ले रहे हैं।
सीएम ने स्वतंत्रता संग्राम की तुलना समुद्र मंथन से करते हुए कहा कि जिस प्रकार समुद्र मंथन में विष और अमृत दोनों निकले, उसी प्रकार स्वतंत्रता आंदोलन में हमारे सेनानियों ने विष रूपी कष्ट सहकर आने वाली पीढ़ियों को आज़ादी का अमृत प्रदान किया। उन्होंने स्वतंत्रता सेनानी लेखक, पत्रकार और वकीलों की योगदान और माखनलाल चतुर्वेदी की कविताओं का उल्लेख किया।
उन्होंने पंडित लोचन प्रसाद पांडेय, पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी और गजानन माधव मुक्तिबोध जैसे साहित्यकारों की स्मृतियों को सहेजने की आवश्यकता पर जोर दिया। रायपुर साहित्य उत्सव के मंडपों को छत्तीसगढ़ के महान साहित्यकारों विनोद कुमार शुक्ल, श्यामलाल चतुर्वेदी, लाला जगदलपुरी और अनिरुद्ध नीरव को समर्पित किया गया है।
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अटल जी कवि हृदय थे और उनकी कविताओं ने करोड़ों लोगों को प्रेरित किया। उन्होंने इमरजेंसी काल में साहित्यकारों की भूमिका को भी रेखांकित किया और दुष्यंत कुमार की प्रसिद्ध पंक्तियों का उल्लेख किया।
उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने उत्सव को साहित्य का महाकुंभ बताया और कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती ने हिंदी साहित्य को कई महान पुरोधा दिए हैं। वहीं, डॉ. कुमुद शर्मा ने कहा कि साहित्य आत्मबोध और सांस्कृतिक चेतना का सशक्त माध्यम है, जो अमृतकाल और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में मार्गदर्शक है।
समारोह के पश्चात अतिथियों और साहित्यकारों ने विभिन्न सत्रों में भाग लेते हुए समकालीन साहित्य, संस्कृति, लोकतंत्र और समाज से जुड़े विषयों पर विचार साझा किए। उत्सव में बड़ी संख्या में युवा साहित्य प्रेमियों की सक्रिय भागीदारी देखी गई, जो यह दर्शाती है कि छत्तीसगढ़ में साहित्यिक वातावरण उजला और सशक्त है। रायपुर साहित्य उत्सव 2026 का यह शुभारंभ सांस्कृतिक चेतना और साहित्यिक संवाद के विस्तार में एक मील का पत्थर साबित होगा।