
इस्लामाबाद: पाकिस्तान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के गाजा को लेकर बनाए गए बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने का फैसला किया है। इस बोर्ड की स्थापना मुख्य रूप से गाजा में युद्धविराम समझौते की निगरानी और क्षेत्र में शांति कायम करने के उद्देश्य से की गई है।
पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री इशाक डार ने इसकी पुष्टि की और बताया कि यह कदम गाजा शांति योजना के समर्थन में उठाया गया है। विदेश मंत्रालय ने भी बयान जारी कर कहा कि पाकिस्तान ने ट्रंप के बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने का न्योता स्वीकार कर लिया है।
हालांकि, शहबाज शरीफ सरकार के इस फैसले का देश के भीतर विरोध शुरू हो गया है। पूर्व सीनेटर मुस्तफा नवाज खोखर ने कहा कि बिना किसी सार्वजनिक बहस और संसद की राय के पाकिस्तान को इस बोर्ड में शामिल कर दिया गया, जो सरकार की जनता के प्रति उदासीनता को दर्शाता है। उन्होंने इसे “औपनिवेशिक कोशिश” बताया और कहा कि बोर्ड का मकसद न केवल गाजा पर नियंत्रण करना है, बल्कि एक संयुक्त राष्ट्र के समानांतर प्रणाली बनाना है।
खोखर ने बोर्ड को ट्रंप का निजी समूह बताया और कहा कि इसमें ट्रंप के पास पूर्ण शक्ति होगी। ट्रंप चेयरमैन के रूप में सदस्यों को नामित या हटाने, बैठकों का समय तय करने और मुद्दों का चयन करने का अधिकार रखेंगे। इसके अलावा बोर्ड में स्थायी सदस्य बनने के लिए 1 अरब डॉलर का शुल्क भी लगाया गया है, जिसे खोखर ने अमीरों का क्लब बताते हुए आलोचना की।
अब तक 8 मुस्लिम देश इस बोर्ड में शामिल हो चुके हैं, जिनमें पाकिस्तान, सऊदी अरब, यूएई, तुर्की, मिस्र, जॉर्डन, इंडोनेशिया और कतर शामिल हैं। इजरायल ने प्रारंभ में तुर्की और कतर की मौजूदगी पर आपत्ति जताई थी, लेकिन बाद में इसे स्वीकार कर लिया। ट्रंप ने दुनिया के 59 नेताओं को इस बोर्ड में शामिल होने का न्योता भेजा है, जिसमें भारत भी शामिल है। भारत ने अभी तक इस पर कोई निर्णय नहीं लिया है।
बोर्ड का मुख्य उद्देश्य गाजा में युद्धविराम समझौते की निगरानी और अन्य क्षेत्रीय संघर्षों को सुलझाना है।