Thursday, May 14

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बिहार चुनाव के बाद बीजेपी का ताबड़तोड़ एक्शन: आरके सिंह के अलावा 2 और नेताओं को पार्टी से निकाला

पटना, 15 नवम्बर 2025: बिहार विधानसभा चुनाव में बंपर जीत के बाद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने बगावत करने वाले तीन नेताओं को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया है। इनमें पूर्व केंद्रीय मंत्री आरके सिंह के अलावा कटिहार की मेयर ऊषा अग्रवाल और एमएलसी अशोक अग्रवाल शामिल हैं। इन नेताओं पर पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण यह कार्रवाई की गई है।

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आरके सिंह पर 6 साल का निलंबन, दो और नेताओं की भी पार्टी से बर्खास्तगी

बीजेपी ने आरके सिंह को 6 साल के लिए पार्टी से निलंबित कर दिया है। इसके अलावा, कटिहार की मेयर ऊषा अग्रवाल और एमएलसी अशोक अग्रवाल पर भी कड़ी कार्रवाई की गई है। बीजेपी ने पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में इन नेताओं को पार्टी से निष्कासित किया है।

बीजेपी के आधिकारिक बयान में कहा गया, “आपकी गतिविधियां पार्टी के विरोध में हैं और ये अनुशासन के उल्लंघन के दायरे में आती हैं। इससे पार्टी को नुकसान हुआ है। आपको एक सप्ताह के भीतर अपनी स्थिति स्पष्ट करने का मौका दिया जाता है।”

चुनाव के बाद बीजेपी का यह पहला एक्शन

बिहार विधानसभा चुनाव में बीजेपी को जब जबरदस्त जीत मिली, उसके बाद पार्टी ने बागी नेताओं पर यह कड़ी कार्रवाई की है। खासकर पूर्व केंद्रीय मंत्री आरके सिंह ने चुनाव के दौरान कई बार पार्टी नेतृत्व के खिलाफ बगावती तेवर दिखाए थे। उन्होंने भाजपा के नेताओं पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे और पार्टी के खिलाफ मुखर रहे थे।

आरके सिंह ने क्या कहा था?

सितंबर में एक सार्वजनिक सभा के दौरान आरके सिंह ने बिहार के नेताओं पर तीखा हमला करते हुए कहा था, “मैं बिहार का गृह सचिव रह चुका हूं, मेरे पास सबका हिसाब है। अगर कोई गलत करेगा तो मैं सबकी बखिया उधेड़ दूंगा। बिहार के लोग भ्रष्ट नेताओं को बर्दाश्त नहीं करेंगे।” इस बयान में उन्होंने न सिर्फ बीजेपी बल्कि बिहार सरकार और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ भी अपनी नाराजगी व्यक्त की थी।

आरके सिंह की सबसे बड़ी आलोचना बिहार में शराबबंदी के मुद्दे को लेकर रही थी। उन्होंने शराबबंदी खत्म करने की वकालत की थी और इसे जनता की आजादी में हस्तक्षेप बताया था।

क्यों हो रही है कार्रवाई?

पार्टी के अंदर और बाहर इन नेताओं के बयान और गतिविधियों ने बीजेपी के लिए असुविधाजनक स्थिति पैदा की थी। खासकर आरके सिंह के बयान, जो न केवल पार्टी नेतृत्व के खिलाफ थे, बल्कि बिहार सरकार की नीतियों पर भी सवाल उठाते थे, ने बीजेपी को मजबूर कर दिया कि वह इस पर त्वरित कार्रवाई करे।

बिहार चुनावों में जीत के बाद पार्टी को उम्मीद है कि इस कदम से पार्टी की अनुशासनहीनता के खिलाफ कड़ा संदेश जाएगा और अन्य नेताओं को भी पार्टी के खिलाफ किसी भी गतिविधि से बचने की चेतावनी मिलेगी।

यह कार्रवाई बीजेपी के लिए संकेत है कि भविष्य में पार्टी किसी भी प्रकार की बगावत या अनुशासनहीनता को नजरअंदाज नहीं करेगी।

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