Thursday, May 14

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ऑनलाइन गेमिंग एप से ठगी करने वाला गैंग गिरफ्तार, ग्रेटर नोएडा में दंपती समेत 8 आरोपी अरेस्‍ट

ग्रेटर नोएडा: ग्रेटर नोएडा की बिसरख पुलिस ने ऑनलाइन गेमिंग एप के माध्यम से ठगी करने वाले एक बड़े गैंग का भंडाफोड़ किया है। इस गैंग के सदस्य सोशल मीडिया पर गेमिंग के आकर्षक विज्ञापन चलाकर लोगों को फर्जी वेबसाइटों पर भेजते थे और गेम खेलने के नाम पर उनसे पैसे जमा करवा लेते थे। पुलिस ने इस गिरोह के आठ सदस्यों को गिरफ्तार किया है, जिसमें एक दंपती भी शामिल है। आरोपियों ने रोजाना 8 से 10 लाख रुपये तक की ठगी की रकम इकट्ठा की थी।

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कैसे काम करता था गैंग?

पुलिस के मुताबिक, आरोपियों का नेटवर्क सोशल मीडिया पर गेमिंग विज्ञापन के जरिए लोगों को लुभाता था। ये विज्ञापन ‘लियो लिंक’ के माध्यम से भेजे जाते थे, जिसके जरिए लोग फर्जी वेबसाइट पर पहुंच जाते थे। एक बार लोग वेबसाइट पर पहुंचते, तो आरोपियों के द्वारा पैसे जमा करने का दबाव बनाया जाता और लोगों को गेम खेलने के नाम पर धनराशि ट्रांसफर करवाई जाती थी। ठगी के शिकार होने के बाद जब लोग धनराशि निकालने के लिए संपर्क करते थे, तो आरोपी उन खातों को कुछ ही दिनों में ‘इनएक्टिव’ कर देते थे।

गिरफ्तारी और बरामदगी

डीसीपी सेंट्रल नोएडा, शक्ति मोहन अवस्थी ने बताया कि पुलिस को सूचना मिली थी कि एक गैंग ऑनलाइन गेमिंग से ठगी कर रहा है। इसके बाद पुलिस ने बिसरख के लॉ रेजीडेंसिया सोसायटी के टॉवर-1 के फ्लैट नंबर-2101 में छापा मारा। यहां से पुलिस ने लैपटॉप, मोबाइल, सिम कार्ड, बैंक पासबुक, चेकबुक और नकदी सहित कई अन्य आपत्तिजनक सामान बरामद किए। आरोपियों के पास से 56 मोबाइल, 8 लैपटॉप, 1 टैबलेट और फर्जी दस्तावेज भी मिले हैं।

आरोपियों की पहचान

गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान अंकित सिंह, कीर्तितं, हिमांशु, चिराग जैन, प्रथम मिश्रा, हर्षित वर्मा, अंश वर्मा और नितिन बाबू के रूप में हुई है। सभी आरोपी इटावा के निवासी हैं और पिछले तीन महीने से ग्रेटर नोएडा में इस ठगी की वारदातों को अंजाम दे रहे थे। आरोपियों ने यह भी खुलासा किया कि वे ‘लियो’ नामक एक व्यक्ति के साथ मिलकर इस नेटवर्क को चला रहे थे।

कैसे फंसाते थे लोग?

आरोपियों के अनुसार, वे सोशल मीडिया पर गेमिंग के आकर्षक विज्ञापन चलाकर लोगों को अपनी तरफ आकर्षित करते थे। एक बार जब लोग लिंक पर क्लिक करते, तो वे फर्जी वेबसाइट पर पहुंच जाते थे। वहां गेम खेलकर पैसे जीतने का लालच दिया जाता और फिर खेल में पैसे लगाने के लिए उनसे पैसे जमा करने को कहा जाता था। इस प्रक्रिया के दौरान आरोपियों ने कई लोगों को ठगा और उनके पैसे अपनी जेब में डाल लिए।

इस गैंग का नेटवर्क इतना बड़ा था कि एक आईडी पर लगभग 3,000 क्लाइंट्स जुड़े होते थे। जब किसी खाते में 50,000 रुपये से अधिक जमा हो जाते थे, तो उसे तुरंत इनएक्टिव कर दिया जाता था, जिससे लोगों का पैसा डूब जाता था।

पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें गिरफ्तार कर लिया है और उनसे ठगी के अन्य मामलों की भी जांच की जा रही है।

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