
मथुरा। मथुरा के शाहजी मंदिर में वसंत पंचमी का उल्लास छा गया है। 23 जनवरी को मंदिर का ऐतिहासिक और रहस्यमयी ‘वसंती कमरा’ भक्तों के लिए खोला जाएगा, जो वर्ष में केवल दो बार खुलता है। देश-दुनिया से श्रद्धालु इस अवसर पर दर्शन के लिए उमड़ते हैं।
वसंती कमरे की विशेषताएं
मंदिर के व्यवस्थापक प्रशांत शाह ने बताया कि पिछले सात दिनों से वसंती कमरे की विशेष सफाई और सजावट का कार्य चल रहा है। इस कमरे का मुख्य आकर्षण प्राचीन कांच के झाड़-फानूस हैं। वसंत पंचमी के दिन ठाकुरजी को वसंती (पीली) पोशाक धारण कराई जाएगी और उनका भव्य श्रृंगार भी वासंतिक होगा।
दर्शन का समय
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रबंधन ने दर्शन का समय निर्धारित किया है। 23 जनवरी (वसंत पंचमी) को सुबह 10 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक और शाम 5 बजे से देर रात तक वसंती कमरे में भजन संध्या का आयोजन होगा। 24 जनवरी को शाम 5 बजे से दर्शन होंगे। इसके पश्चात यह विशेष कक्ष बंद कर दिया जाएगा।
शाहजी मंदिर की स्थापत्य विशेषताएं
शाहजी मंदिर अपने अद्वितीय स्थापत्य और ‘टेढ़े-मेढ़े खंभों’ के लिए प्रसिद्ध है। लखनऊ के धनी जौहरी भाइयों शाह कुंदन लाल और शाह फुंदन लाल द्वारा निर्मित यह मंदिर नवाबी और विदेशी कला का मिश्रण दर्शाता है। मुख्य भाग में लगे 15 फुट के टेढ़े खंभे इंजीनियरिंग का अद्भुत नमूना हैं। मंदिर की मुंडेर रोमन शैली से प्रेरित है।
नवाब वाजिद अली शाह की भक्ति
मंदिर के चौक में नवाब वाजिद अली शाह की सखी वेश में मूर्ति फर्श पर स्थित है। इसका उद्देश्य था कि भक्तों के चरणों की धूल उन पर पड़े और वे स्वयं को धन्य मान सकें। वसंत पंचमी के बाद वसंती कमरा वर्ष में केवल सावन मास की त्रयोदशी और चतुर्दशी को ही खोला जाएगा।