Friday, January 23

किसी भी बिल्डर को राहत देने से इनकार सब्सिडी योजना घोटाला: सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख, CBI की जांच में 28 FIR

सुप्रीम कोर्ट ने रियल एस्टेट कारोबारियों और वित्तीय संस्थानों के बीच सब्सिडी योजनाओं के दुरुपयोग को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि घर खरीदारों का शोषण करने वाले किसी भी बिल्डर या उनसे जुड़े व्यक्ति को किसी तरह की राहत नहीं दी जाएगी। शीर्ष अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह एक सुनियोजित और गहरी साजिश प्रतीत होती है, जिसके चलते हजारों घर खरीदार वर्षों तक ईएमआई चुकाने के बावजूद अपने फ्लैटों से वंचित रहे।

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मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने कहा कि जो भी व्यक्ति या संस्था—even दूर से ही—इस घोटाले से जुड़ी पाई जाएगी और जिसने घर खरीदारों को गंभीर उत्पीड़न झेलने पर मजबूर किया है, वह इस कार्यवाही का हिस्सा बनी रहेगी और कठोर परिणाम भुगतेगी। पीठ ने दो टूक कहा, “इस स्तर पर किसी को भी रियायती लाभ नहीं दिया जा सकता।”

CBI की कार्रवाई: 28 FIR, 3 मामलों में चार्जशीट

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने अदालत को बताया कि सुप्रीम कोर्ट के पूर्व आदेशों के अनुपालन में सीबीआई ने अब तक 28 नियमित मामले (FIR) दर्ज किए हैं। इनमें से तीन मामलों की जांच पूरी हो चुकी है और आरोपपत्र दाखिल कर दिए गए हैं। अदालत ने निचली अदालत को निर्देश दिया है कि दो सप्ताह के भीतर आरोपपत्रों पर संज्ञान लिया जाए और मुकदमे की सुनवाई तेजी से आगे बढ़ाई जाए

किन परियोजनाओं पर शिकंजा

जिन मामलों में आरोपपत्र दाखिल किए गए हैं, उनमें शामिल हैं—

  • रुद्र बिल्डवेल प्राइवेट लिमिटेड (केबीनाउज़ अपार्टमेंट्स, ग्रेटर नोएडा)
  • ड्रीम प्रोकॉन प्राइवेट लिमिटेड
  • लॉजिक्स सिटी डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड (विक्ट्री ऐस प्रोजेक्ट, नोएडा)
  • जयपी इंफ्राटेक और जयप्रकाश एसोसिएट्स (ऑर्चर्ड्स प्रोजेक्ट, नोएडा)

हालांकि, इन तीनों आरोपपत्रों में केवल रियल एस्टेट कंपनियों के निदेशकों को आरोपी बनाया गया है, जबकि बैंक अधिकारियों को फिलहाल आरोपी नहीं बनाया गया—जिसे लेकर अदालत में भी चर्चा हुई।

शेष 25 मामलों की जांच तेज

ऐश्वर्या भाटी ने यह भी बताया कि दिल्ली की राउज़ एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश ने अभी तक तीनों आरोपपत्रों पर संज्ञान नहीं लिया है। वहीं, शेष 25 मामलों की जांच तेज़ी से चल रही है और मार्च के अंत तक इसमें उल्लेखनीय प्रगति की उम्मीद है।

और भी शिकायतें CBI को सौंपी जाएंगी

पीठ ने यह भी रेखांकित किया कि पिछले वर्ष 22 जुलाई और 23 सितंबर को दिए गए आदेशों के बाद कई अन्य घर खरीदार भी इसी तरह की शिकायतों के साथ अदालत पहुंचे हैं। अदालत ने निर्देश दिया कि इन याचिकाओं को CBI को सौंपा जाए, ताकि यह तय किया जा सके कि इन मामलों की भी आपराधिक जांच आवश्यक है या नहीं।

‘रिपोर्ट से चौंकाने वाला सच सामने आया’

पीठ ने न्यायमूर्ति राजीव जैन द्वारा किए गए विस्तृत विश्लेषणात्मक कार्य की सराहना करते हुए कहा कि उनकी रिपोर्ट से यह चौंकाने वाला सच सामने आया है कि किस तरह घर खरीदारों और भू-स्वामियों के साथ अनुचित और अमानवीय व्यवहार किया गया। अदालत ने कहा कि यह रिपोर्ट CBI को जांच को उसके तार्किक और न्यायपूर्ण निष्कर्ष तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाएगी।

निष्कर्ष:
सुप्रीम कोर्ट के इस सख्त संदेश ने साफ कर दिया है कि घर खरीदारों के साथ धोखाधड़ी करने वाले बिल्डरों और उनसे जुड़े नेटवर्क के लिए अब कानून से बच निकलना आसान नहीं होगा। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे तथा कड़ी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।

 

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