Wednesday, January 21

सहारनपुर हत्याकांड में चौंकाने वाले खुलासे परिवार को पहले भी मारने की कोशिश कर चुका था संग्रह अमीन, पिता की मौत भी रही संदिग्ध

सहारनपुर। जिले के कौशिक विहार कॉलोनी में सामने आए सामूहिक हत्याकांड ने पूरे इलाके को दहला दिया है। सोमवार देर रात संग्रह अमीन अशोक राठी ने अपनी मां विद्यावती, पत्नी अंजिता और दो बेटों—कार्तिक व देव—की गोली मारकर हत्या कर दी, इसके बाद उसने खुद को भी गोली मारकर आत्महत्या कर ली। पुलिस जांच में इस मामले से जुड़े कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं।

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पुलिस के अनुसार, अशोक राठी लंबे समय से मानसिक अवसाद से जूझ रहा था। उसके साले राहुल ने बताया कि करीब एक साल पहले भी अशोक ने पूरे परिवार को नींद की गोलियां खिलाकर जान से मारने की कोशिश की थी, हालांकि उस समय सभी बच गए थे। इसके अलावा, कोरोना काल के दौरान भी उसके द्वारा आत्महत्या का प्रयास किए जाने की बात सामने आई है।

 

नींद या नशीली दवाओं का शक

मौके पर पहुंचे अंजिता के भाई राहुल का कहना है कि शवों की स्थिति देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि गोली मारने से पहले सभी को नींद या नशीली गोलियां दी गई थीं। सभी शव अपने-अपने बिस्तर पर पाए गए और किसी तरह की हाथापाई के निशान नहीं मिले। इससे वारदात को योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिए जाने की आशंका गहराती है।

 

चंडीगढ़ से चल रहा था इलाज

पड़ोसियों के मुताबिक, अशोक पिछले कुछ समय से मानसिक रूप से परेशान नजर आ रहा था और उसका चंडीगढ़ से इलाज चल रहा था। लोगों का कहना है कि वह कम बोलने वाला था और अक्सर तनाव में दिखता था।

 

पिता की मौत भी संदिग्ध

मामले में एक और गंभीर पहलू सामने आया है। करीब साढ़े तीन साल पहले अशोक के पिता सुरेंद्र सिंह की भी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी। बताया जा रहा है कि उनकी सेवानिवृत्ति में महज पांच-छह दिन शेष थे। उस समय भी परिवार और आसपास के लोगों में कई सवाल उठे थे।

 

ना दफ्तर का दबाव, ना पारिवारिक कलह

अशोक के सहकर्मियों का कहना है कि वह अपने काम को लेकर जिम्मेदार था और विभागीय स्तर पर उस पर किसी तरह का दबाव नहीं था। न ही कभी पारिवारिक कलह की कोई शिकायत सामने आई। ऐसे में यह घटना सभी के लिए हैरान करने वाली है।

 

फिलहाल पुलिस मामले की हर पहलू से जांच कर रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फोरेंसिक जांच के बाद ही पूरी सच्चाई सामने आ सकेगी। यह हत्याकांड न सिर्फ एक परिवार की त्रासदी है, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य को लेकर समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी भी है।

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