
नई दिल्ली: भारत को 15 अगस्त 1947 को आजादी मिली थी, लेकिन 21 जनवरी का दिन भी भारतीय इतिहास में विशेष महत्व रखता है। इस दिन 1972 में आजादी के लगभग 25 साल बाद, त्रिपुरा, मणिपुर और मेघालय को पूर्ण राज्य का दर्जा मिला। तब से हर साल इन तीनों राज्यों का राज्य स्थापना दिवस मनाया जाता है। यह जानकारी UPSC और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।
आजादी के बाद राज्यों का गठन
पीआईबी और सरकारी दस्तावेजों के अनुसार, 21 जनवरी 1972 को नॉर्थ ईस्टर्न रीजन री–ऑर्गेनाइजेशन एक्ट-1971 (NEA-(R) Act, 1971) के तहत त्रिपुरा, मणिपुर और मेघालय को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया गया। इससे पहले मेघालय असम का हिस्सा था, जबकि त्रिपुरा और मणिपुर केंद्र शासित प्रदेश थे।
मणिपुर की राज्य बनने की कहानी
मणिपुर 1947 से पहले एक स्वतंत्र रियासत था। महाराजा बोधचंद्र सिंह ने भारत सरकार के साथ ‘इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन’ पर साइन किया, जिसके बाद 1948 में पहला चुनाव हुआ और यह संवैधानिक राजशाही बन गया। 1949 में मणिपुर की चुनी हुई विधानसभा की सलाह के बिना महाराजा ने विलय समझौते पर हस्ताक्षर किए। इसके बाद मणिपुर की विधानसभा भंग कर दी गई और यह एक Part C स्टेट बना। 1 नवंबर 1956 को मणिपुर यूनियन टेरिटोरियल काउंसिल एक्ट-1956 के तहत यह केंद्र शासित प्रदेश बन गया। अंततः 21 जनवरी 1972 को इसे पूर्ण राज्य का दर्जा मिला।
मेघालय का राज्य बनने का सफर
मेघालय की यात्रा असम से अधिक स्वायत्तता की मांगों के साथ शुरू हुई थी। 1969 में असम पुनर्गठन अधिनियम के तहत मेघालय को असम में एक स्वायत्त राज्य (Autonomous State) का दर्जा मिला। इसके बाद NEA-(R) एक्ट-1971 ने मेघालय को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया। मेघालय की राजधानी शिलांग है और यहाँ का मौसम ऊंचाई के अनुसार बदलता रहता है।
त्रिपुरा का राज्य गठन
त्रिपुरा 1949 में भारत में विलय हुआ, जिसमें रानी कंचन प्रभा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विलय के बाद त्रिपुरा एक Part C स्टेट बना और 1956 में यह केंद्र शासित प्रदेश बना। 21 जनवरी 1972 को NEA-(R) एक्ट-1971 के तहत त्रिपुरा को पूर्ण राज्य का दर्जा मिला। त्रिपुरा की राजधानी अगरतला है और यह गुवाहाटी के बाद पूर्वोत्तर भारत का दूसरा सबसे बड़ा शहर है।
निष्कर्ष
21 जनवरी का दिन भारतीय इतिहास में विशेष महत्व रखता है क्योंकि इस दिन तीन नए राज्यों का गठन हुआ। आज भी यह दिन मेघालय, मणिपुर और त्रिपुरा के लिए गौरव और उत्सव का अवसर है।