
रांची: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन 20 जनवरी को दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की वार्षिक बैठक में झारखंड का प्रतिनिधित्व करेंगे। इस अवसर पर वे दुनिया भर के नीति निर्माता, औद्योगिक दिग्गज और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के साथ द्विपक्षीय चर्चा करेंगे, ताकि राज्य में निवेश और औद्योगिक अवसरों को बढ़ावा दिया जा सके।
विकास का संदेश: प्रकृति और स्थिरता के साथ
झारखंड इस मंच पर “प्रकृति के साथ संतुलन में विकास” के दृष्टिकोण को पेश करेगा। राज्य का मकसद न केवल खनिज संसाधनों का उपयोग करना है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, समुदायों की भागीदारी और टिकाऊ औद्योगिक विकास के जरिए समावेशी प्रगति को सुनिश्चित करना है।
वैश्विक कंपनियों और संस्थानों के साथ उच्च-स्तरीय बैठकें
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन टाटा स्टील, हिताची, श्नाइडर इलेक्ट्रिक, इंफोसिस, वेलस्पन, एबी इनबेव, ब्लूमबर्ग, टेक महिंद्रा, अल्फानार, रामकी ग्रुप, एवरस्टोन ग्रुप सहित यूरोप, अमेरिका और स्वीडन की वैश्विक व्यापार परिषदों और संस्थानों के प्रमुखों से मुलाकात करेंगे। इन बैठकों में टिकाऊ उद्योग, हरित ऊर्जा, आधुनिक बुनियादी ढाँचा, डिजिटल तकनीक और जलवायु अनुकूल औद्योगिक विकास में निवेश के अवसरों पर चर्चा होगी।
झारखंड मंडप का उद्घाटन
दावोस में झारखंड मंडप का उद्घाटन भी एक प्रमुख आकर्षण होगा। यह मंडप राज्य की निवेश संभावनाओं, नीतिगत सुधारों और दीर्घकालिक विकास योजनाओं को वैश्विक स्तर पर पेश करेगा। इसके माध्यम से राज्य न केवल खनन और औद्योगिक ताकत दिखाएगा, बल्कि हरित विकास, जिम्मेदार संसाधन प्रबंधन और समावेशी रोजगार की दिशा में अपनी पहल को भी प्रदर्शित करेगा।
विकास मॉडल: लोगों, प्रकृति और स्थिरता पर आधारित
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का मानना है कि झारखंड का विकास मॉडल समुदायों की भागीदारी, महिलाओं के नेतृत्व वाले उद्यम, नवीकरणीय ऊर्जा और कौशल विकास पर आधारित होना चाहिए। दावोस यात्रा के दौरान राज्य वैश्विक और भारतीय मीडिया से भी संवाद करेगा और यह संदेश देगा कि विकास के साथ जिम्मेदारी भी जरूरी है।
वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में झारखंड की यह भागीदारी राज्य के 25 साल पूरे होने के अवसर पर वैश्विक मंच पर उसकी पहचान को मजबूती देती है और सतत, समावेशी और टिकाऊ विकास के नए दौर की शुरुआत करती है।