
पटना: क्या आप भी हल्की सी सर्दी, खांसी या बुखार में तुरंत गूगल या एआई पर दवाओं की तलाश करते हैं? अगर हाँ, तो सावधान हो जाइए! बिना डॉक्टर की सलाह के दवाएं लेने की यह आदत किडनी और लीवर को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है।
पटना के आईजीआईएमएस (इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान) के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, स्किन और मेडिसिन विभाग में पिछले 10 महीनों में 49 मरीजों की हालत ऐसे ही दवाओं के गलत इस्तेमाल के कारण बिगड़ गई। इनमें से 23 मरीजों ने अपनी बीमारी के इलाज के लिए गूगल और एआई से मिली जानकारी के आधार पर एंटीबायोटिक दवाएं खा ली थीं। बाकी मरीज झोलाछाप डॉक्टरों या सीधे मेडिकल स्टोर से बिना पर्ची दवाएं ले आए।
एंटीबायोटिक दवाएं भी जहर से कम नहीं
आईजीआईएमएस के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. मनीष मंडल के अनुसार, आजकल लोग डॉक्टर से सलाह लेने के बजाय गूगल, एआई या परिचितों से जानकारी लेकर दवाएं ले लेते हैं। हालिया अध्ययन में यह पाया गया कि सल्फोनामाइड ग्रुप की एंटीबायोटिक दवाओं से एलर्जिक रिएक्शन के मामले सबसे अधिक सामने आए हैं। कुछ मरीजों ने इसे लेने के कुछ ही घंटों बाद शरीर का रंग काला पड़ने जैसी गंभीर एलर्जी का सामना किया।
पेनकिलर भी खतरनाक
डॉ. मंडल ने चेतावनी दी कि केवल एंटीबायोटिक दवाएं ही नहीं, बल्कि बिना सलाह के दर्द निवारक दवाओं का सेवन भी खतरनाक है। कुछ मरीजों को इसके कारण किडनी या लीवर की गंभीर समस्या हुई, जिन्हें डायलिसिस या यहां तक कि किडनी ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ गई।
उन्होंने कहा कि ओफ्लॉक्सासिन, ऑर्निडाजोल और निमुसुलाइड जैसी दवाओं से भी गंभीर रिएक्शन का खतरा रहता है। डॉक्टर जब इन दवाओं को लिखते हैं, तो साथ में सहायक दवाएं भी देते हैं, जो दुष्प्रभाव से बचाती हैं।
सावधानी जरूरी
डॉक्टरों की सलाह है कि हल्की सर्दी-खांसी में भी गूगल और एआई पर भरोसा करना खतरनाक है। केवल योग्य चिकित्सक से परामर्श लेकर ही दवाओं का सेवन करें।