
नई दिल्ली: भविष्य के घर अब ईंट, पत्थर और कांच तक सीमित नहीं रहेंगे। दक्षिण कोरिया के वैज्ञानिकों ने ऐसी अनोखी स्मार्ट विंडो तैयार की है, जो देखने में शीशे जैसी चमकती है, लेकिन असल में लकड़ी से बनी है। यह खिड़की बिना किसी बिजली, सेंसर या कंट्रोल सिस्टम के घर का तापमान खुद नियंत्रित कर सकती है।
इस तकनीक को हानबाट नेशनल यूनिवर्सिटी और कोंगजू नेशनल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने विकसित किया है। वैज्ञानिकों ने बाल्सा लकड़ी में लिक्विड क्रिस्टल मिलाकर इसे पारदर्शी बनाया, जिससे यह शीशे जैसी दिखती है और सूर्य की हानिकारक अल्ट्रावायलेट (UV) किरणों को रोकने में सक्षम हो गई है।
कैसे काम करती है यह स्मार्ट खिड़की?
रिसर्च के अनुसार, जब कमरे का तापमान कम होता है, तब यह खिड़की पारदर्शी हो जाती है और सूरज की रोशनी अंदर आने देती है, जिससे कमरा गर्म हो सके। वहीं, जब तापमान बढ़ जाता है, तो यह अपने आप अपारदर्शी हो जाती है और ज्यादा गर्मी को अंदर आने से रोकती है। यह पूरी प्रक्रिया बिना किसी बिजली खर्च के होती है।
बिजली बचाने में होगी मदद
वैज्ञानिकों के अनुसार, सामान्य तापमान पर यह खिड़की केवल 28 प्रतिशत रोशनी को अंदर आने देती है। जैसे ही तापमान 40 डिग्री तक पहुंचता है, यह प्रकाश नियंत्रण की क्षमता बढ़ा देती है। इससे एयर कंडीशनर और हीटर का इस्तेमाल कम होगा और बिजली के बिल में बड़ी बचत संभव हो सकेगी।
भारत के लिए क्यों है खास?
NBT नजरिया: भारत जैसे देश में, जहां गर्मी और सर्दी दोनों चरम पर होती हैं, यह तकनीक बेहद उपयोगी साबित हो सकती है। अगर यह स्मार्ट विंडो व्यावसायिक रूप से उपलब्ध होती है, तो यह कांच और प्लास्टिक का बेहतर विकल्प बन सकती है और ऊर्जा बचत के साथ पर्यावरण संरक्षण में भी अहम भूमिका निभाएगी।