
पटना (सुनील पाण्डेय) – बिहार की राजनीति और रेलवे प्रशासन के एक बड़े घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। ‘लैंड फॉर जॉब’ घोटाले की सीबीआई चार्जशीट में पूर्व आईएएस आरके महाजन (A-8) की भूमिका सामने आई है। आरोप है कि उन्होंने तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव के निजी सचिव के तौर पर कई उम्मीदवारों की मनमाने ढंग से नियुक्तियों में मदद की।
तीन पूर्व महाप्रबंधक – विजय कुमार मांगलिक, प्रदीप कुमार और गिरीश भटनागर – सरकारी गवाह बनकर महाजन की पोल खोल चुके हैं। गवाहों के अनुसार, आरके महाजन एमआर सेल (रेल मंत्री कार्यालय) के जरिए ट्रेन डाक से उम्मीदवारों के आवेदन प्राप्त कर, नियुक्तियों के लिए सीधे निर्देश देते थे।
मुख्य गवाह वीके मांगलिक ने बताया कि उन्हें एक लिफाफा मिला जिसमें छह उम्मीदवारों के आवेदन थे। लिफाफे पर ‘From Mahajan’ लिखा था और आरके महाजन ने टेलीफोन पर नियुक्ति के निर्देश दिए थे। इसी प्रकार, अन्य महाप्रबंधकों ने भी यह खुलासा किया कि महाजन लालू यादव द्वारा अनुशंसित उम्मीदवारों को सरकारी नौकरियों में लगवाने में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे।
सीबीआई ने कहा है कि आरके महाजन का यह कार्य आर्थिक लाभ दिलाने और सरकारी पद के दुरुपयोग के समान था। आरोप है कि उन्होंने अपने आधिकारिक पद का प्रयोग लालू यादव के अनुशंसित उम्मीदवारों को लाभ पहुंचाने के लिए किया, जिसमें कुछ ने प्रतिफल स्वरूप जमीन भी दी।
आरके महाजन की पृष्ठभूमि:
हिमाचल प्रदेश निवासी, 1987 बैच, बिहार कैडर IAS।
लालू यादव के रेल मंत्री रहते हुए उनके निजी सचिव और जन शिकायत कोषांग के कार्यकारी निदेशक।
2004-2009 में रेल मंत्रालय में अहम पद पर तैनात।
2015 में महागठबंधन सरकार में स्वास्थ्य विभाग का प्रधान सचिव।
नीतीश कुमार सरकार में शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव और बीपीएससी के अध्यक्ष।
बीपीएससी अध्यक्ष रहते हुए 2022 में प्रारंभिक परीक्षा पेपर लीक हुआ, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
31 अगस्त 2020 को रिटायर हुए।
इस खुलासे के साथ ही सीबीआई ने आरके महाजन को पद के दुरुपयोग और साजिश के तहत आरोपी बनाया है, जबकि लालू यादव और अन्य से जुड़े मामलों की जांच जारी है।