
बॉलीवुड की दिग्गज अभिनेत्री सुहासिनी मुले ने श्रीराम राघवन की फिल्म ‘इक्कीस‘ की आलोचना पर जनता और समीक्षकों को जमकर फटकार लगाई है। 75 वर्षीय अभिनेत्री ने कहा कि आज के समय में ‘इक्कीस‘ जैसी फिल्म को ट्रोल किया जाता है, जबकि ‘द कश्मीर फाइल्स‘ जैसी फिल्मों को एंटरटेनमेंट टैक्स में छूट मिल जाती है।
सुहासिनी मुले ने गुवाहाटी प्रेस क्लब में कहा, “हमारा देश उस दौर में जी रहा है जहां सिनेमाघरों में वही फिल्में बंपर कमाई करती हैं, जिनमें भर–दम शोर और हिंसा होती है। जबकि सरल और यथार्थपरक फिल्में अक्सर बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप साबित होती हैं।”
‘इक्कीस’ में किया गया संदेश
सुहासिनी मुले ने बताया कि उन्होंने श्रीराम राघवन के निर्देशन में बनी ‘इक्कीस’ में महेश्वरी खेत्रपाल का किरदार निभाया। यह फिल्म एक वॉर ड्रामा बायोपिक है, लेकिन असल में एक एंटी–वॉर फिल्म भी है। फिल्म सवाल उठाती है कि “अगर खून–खराबा और ट्रॉमा नहीं, तो युद्ध क्या लाता है?“। यही कारण है कि इसे ऑनलाइन आलोचना का सामना करना पड़ा।
उन्होंने कहा, “लोग इसे इसलिए ट्रोल कर रहे हैं क्योंकि इसमें पाकिस्तानियों को ‘भूत और शैतान’ के रूप में नहीं दिखाया गया, बल्कि इंसान के रूप में। यही कारण है कि इस दौर में ऐसी फिल्म बनाना कठिन है।”
हिंसा पर दो टूक राय
सुहासिनी ने आगे कहा, “अब पॉलिटिकल सिनेमा वैचारिक रूप से दक्षिणपंथी हो गया है और धार्मिक वर्चस्व आम बात है। हिंसा का जो प्रदर्शन हुआ, वह मैंने पहले कभी नहीं देखा। यह मानसिक और शारीरिक दोनों तरह का था और इसी देश के लोगों और अल्पसंख्यकों को ‘अन्य’ बना दिया गया।”
निर्देशक का बयान
फिल्म के निर्देशक श्रीराम राघवन ने भी ट्रोलिंग पर अपनी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा, “मैं पूरी तरह हैरान था। अलग–अलग लोग अलग–अलग तरह की फिल्में बनाते हैं। मैंने वह बनाया जो मेरे लिए सबसे अच्छा था। मैं चाहता था कि लोग फिल्म देखकर अपने दिल में एक खास भावना लेकर बाहर आएं।”
सुहासिनी मुले की इस प्रतिक्रिया ने फिल्म और समाज में बढ़ती हिंसा, आलोचना और मीडिया के दृष्टिकोण पर नई बहस को जन्म दिया है।