Wednesday, January 14

ईरान से बिजनेस पर 25% टैरिफ: भारत पर असर सीमित या चिंता बढ़ेगी? जानिए एक्सपोर्टर्स का रुख

नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने ऐलान किया है कि ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों से अमेरिका में आने वाले माल पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगेगा। इस घोषणा ने भारत, चीन और यूएई जैसे देशों में चिंता बढ़ा दी है।

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पिछले साल भारत और ईरान के बीच व्यापार लगभग 1.7 अरब डॉलर का था। भारत के निर्यातक इस मामले पर मिश्रित प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।

काफी असर पड़ेगा
PHDCCI के CEO रंजीत मेहता ने कहा कि अगर यह 25% टैरिफ पहले से लागू 50% टैरिफ के साथ जोड़ दिया गया, तो अमेरिका को भारत से टेक्सटाइल्स, जेम्स एंड जूलरी, लेदर और फुटवियर, ऑटोमोबाइल कंपोनेंट्स, केमिकल प्रोडक्ट्स और समुद्री उत्पादों के निर्यात पर बड़ा असर पड़ेगा।

भारत पर असर नहीं
वहीं, निर्यातकों के संगठन FIEO ने कहा कि भारत पर इसका असर बहुत कम होगा। ईरान के साथ अधिकतर व्यापार मानवीय आधार पर हो रहा है और यह पहले के अमेरिकी प्रतिबंधों से बाहर है। FIEO के अनुसार, अमेरिका की 25% अतिरिक्त टैरिफ की घोषणा भारत के लिए लगभग कोई प्रभाव नहीं पैदा करेगी।

‘US का रुख अभी साफ नहीं
PHDCCI के प्रेसिडेंट राजीव जुनेजा ने कहा कि अमेरिका ने अभी कोई टैरिफ शेड्यूल या कस्टम गाइडलाइन जारी नहीं की है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि किन उत्पादों और सेवाओं पर यह अतिरिक्त टैरिफ लागू होगा। “ईरान के साथ व्यापार करने का अर्थ भी फिलहाल पूरी तरह स्पष्ट नहीं है,” उन्होंने बताया।

कुछ सेक्टरों में चिंता बढ़ सकती है
जेम्स एंड जूलरी सेक्टर के लिए कामा जूलरी के एमडी कोलिन शाह ने कहा कि अगर अतिरिक्त 25% टैरिफ लागू हुआ, तो अमेरिका में भारतीय जूलरी का निर्यात प्रभावित हो सकता है। उन्होंने बताया कि वैश्विक अनिश्चितता और उच्च ब्याज दरों के कारण पहले से ही मांग कमजोर चल रही है। यदि कुल टैरिफ 75% हो गया, तो इंडियन प्रोडक्ट अमेरिका में बहुत महंगे हो जाएंगे। डायमंड स्टडेड और हैंडमेड गोल्ड जूलरी में मार्जिन पहले से कम है। अतिरिक्त टैरिफ के लागू होने पर ऑर्डर रुक सकते हैं, कॉन्ट्रैक्ट्स पर नई बातचीत करनी पड़ सकती है और अमेरिकी खरीदार अन्य देशों की ओर रुख कर सकते हैं।

निष्कर्ष
हालांकि भारत के लिए व्यापक असर की संभावना कम है, कुछ विशेष सेक्टर और निर्यातक अमेरिकी टैरिफ के बढ़ने को लेकर सतर्क हैं। स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और निर्यातक सरकारी दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए अपने व्यापारिक फैसले ले रहे हैं।

 

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