
पाकिस्तान में आतंकवाद किसी छिपे एजेंडे का हिस्सा नहीं, बल्कि एक संगठित और संरक्षित “इंडस्ट्री” बन चुका है। हाल के दिनों में प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर का कथित ऑडियो और उसके डिप्टी सैफुल्लाह कसूरी का वीडियो इसी सच्चाई को एक बार फिर उजागर करता है। इन संदेशों के जरिए न केवल भारत को धमकाने की कोशिश की गई है, बल्कि यह भी स्पष्ट होता है कि पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसी ISI का आतंकवादी नेटवर्क से गहरा गठजोड़ आज भी कायम है।
खतरे की घंटी
मसूद अजहर के ऑडियो और कसूरी के वीडियो को पाकिस्तान समर्थक और ISI से जुड़े सोशल मीडिया अकाउंट्स द्वारा खुलेआम साझा किया गया। यह तथ्य अपने आप में इस बात का प्रमाण है कि आतंकवाद को वहां संस्थागत संरक्षण प्राप्त है। कसूरी द्वारा एक स्कूल परिसर में सैकड़ों बच्चों की मौजूदगी के बीच भाषण देना इस ओर इशारा करता है कि पाकिस्तान में नई पीढ़ी को कट्टरपंथ की ओर धकेलने का संगठित प्रयास जारी है। बताया जा रहा है कि मसूद अजहर भी सार्वजनिक मंच से संबोधन कर रहा था—जो यह दर्शाता है कि आतंकियों को सुरक्षा एजेंसियों का संरक्षण हासिल है।
मंशा क्या है?
ऑपरेशन सिंदूर के बाद जैश-ए-मोहम्मद का आतंकी ढांचा बुरी तरह ध्वस्त हो चुका है। संगठन के कई शीर्ष आतंकी, जिनमें मसूद अजहर के परिवार के सदस्य भी शामिल थे, मारे जा चुके हैं। ऐसे में नए नेटवर्क के खड़े होने की संभावना सीमित दिखती है। विशेषज्ञों का मानना है कि मसूद अजहर का यह कथित ऑडियो वास्तविक ताकत का प्रदर्शन नहीं, बल्कि हताशा में दी गई एक खोखली धमकी है। इसका उद्देश्य संगठन की साख बचाना और बिखरे हुए कैडर को फिर से एकजुट करना है।
प्रॉक्सी वॉर की पुरानी नीति
1971 के बाद भारत से हर प्रत्यक्ष युद्ध में पराजय झेलने के बाद पाकिस्तान ने प्रॉक्सी युद्ध को अपनी रणनीति बना लिया। धार्मिक संगठनों और आतंकी गुटों—जैसे मरकज दावा-अल-इरशाद, जमात-ए-इस्लामी, सिपह-ए-सहाबा और जैश-ए-मोहम्मद—को आगे कर भारत में अस्थिरता फैलाने की कोशिश की गई। जनरल जिया-उल-हक के दौर में धार्मिक उन्माद को राज्य नीति का हिस्सा बनाया गया, जिसने आतंकवाद की जड़ें और गहरी कर दीं।
आतंक ही ‘ताकत’
अमेरिकी पत्रकार पामेला कॉन्स्टेबल ने अपनी पुस्तक ‘गन्स एंड येलो रोजेज’ में पाकिस्तान में पनप रहे आतंकी संगठनों की मानसिकता का वर्णन करते हुए लिखा है कि भारतीयों के खिलाफ जिहाद को ‘जन्नत का रास्ता’ बताया जाता है। यही सोच दशकों से आतंकवाद को पोषित कर रही है।
भारत से जलन और वैश्विक साजिश
पाकिस्तान का उद्देश्य स्पष्ट है—भारत की बढ़ती आर्थिक और वैश्विक ताकत को रोकना। वह चाहता है कि भारत विकास के रास्ते से भटककर उसके रचे प्रॉक्सी वॉर में उलझा रहे। साथ ही, कश्मीर को लेकर झूठा नैरेटिव गढ़कर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत को बदनाम करने की कोशिश भी जारी है। इस प्रोपेगेंडा को समय-समय पर चीन और अमेरिका जैसे देशों से अप्रत्यक्ष समर्थन मिलता रहा है।
सतर्कता जरूरी
पाकिस्तान से जारी ये ऑडियो-वीडियो जैश-ए-मोहम्मद के टूटे ढांचे को फिर से खड़ा करने की कोशिश का हिस्सा हो सकते हैं। भले ही इन्हें अभी तक खोखली धमकी माना जा रहा हो, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों को पूरी सतर्कता बरतनी होगी। जब तक इन संदेशों की तकनीकी जांच पूरी नहीं हो जाती, किसी भी खतरे को नजरअंदाज करना भारत की सुरक्षा के लिए घातक हो सकता है।
निष्कर्षतः, पाकिस्तान की रणनीति साफ है—आतंकवाद के जरिए भारत को अस्थिर रखना। ऐसे में भारत को न केवल सैन्य बल्कि कूटनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी पूरी मजबूती के साथ जवाब देने की जरूरत है।