
हरियाणा के फरीदाबाद स्थित अल-फलाह विश्वविद्यालय परिसर को प्रवर्तन निदेशालय (ED) मनी लॉन्ड्रिंग रोधी कानून (PMLA) के तहत कुर्क कर सकता है। आधिकारिक सूत्रों ने रविवार को यह जानकारी दी।
ईडी इस बात की जांच कर रही है कि विश्वविद्यालय के निर्माण के लिए धन कथित तौर पर अपराध की आय (Proceeds of Crime) से तो नहीं जुटाया गया था। ईडी का आरोप है कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी ने खुद को यूजीसी मान्यता प्राप्त और एनएएसी मान्यता प्राप्त बताकर छात्रों को गुमराह किया।
चेयरमैन गिरफ्तार
अल-फलाह समूह के चेयरमैन जव्वाद अहमद सिद्दीकी को नवंबर 2025 में ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार किया था। केंद्रीय जांच एजेंसी का दावा है कि इन शैक्षणिक संस्थानों के पास पढ़ाने के लिए आवश्यक वैध मान्यताएं नहीं थीं।
धौज में बनाई गई विश्वविद्यालय की संपत्तियां कुर्क होंगी
ईडी ने यह भी बताया कि पहचानी गई “अपराध की आय” का एक हिस्सा फरीदाबाद के धौज इलाके में स्थित विश्वविद्यालय की इमारतों के निर्माण में लगाया गया। इन संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया जाएगा। हालांकि, छात्रों की पढ़ाई पर किसी भी तरह का असर नहीं पड़ेगा और विश्वविद्यालय में शिक्षा बिना रुकावट जारी रहेगी।
415.10 करोड़ रुपये की कथित काली कमाई
ईडी ने अदालत को बताया कि विश्वविद्यालय और उसका नियंत्रक ट्रस्ट सिद्दीकी के निर्देश पर, छात्रों और अभिभावकों को झूठी मान्यता और स्वीकृति के दावों के आधार पर कम से कम 415.10 करोड़ रुपये की “अपराध की आय” अर्जित कर चुके हैं। विश्वविद्यालय की भूमिका “व्हाइट-कॉलर” आतंकी मॉड्यूल की जांच के दौरान सामने आई, जिसमें तीन डॉक्टरों सहित 10 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया।