
नई दिल्ली।
भारत की मेजबानी में अगले सप्ताह होने जा रही कॉमनवेल्थ प्रिसाइडिंग ऑफिसर्स कॉन्फ्रेंस (CSPOC) से पाकिस्तान और बांग्लादेश के नदारद रहने की प्रबल संभावना है। यह सम्मेलन 14 से 16 जनवरी तक नए संसद भवन में आयोजित किया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक, दोनों देशों की अनुपस्थिति किसी नियम उल्लंघन का नतीजा नहीं, बल्कि मौजूदा क्षेत्रीय और कूटनीतिक परिस्थितियों से जुड़ा फैसला है।
कॉमनवेल्थ देशों की संसदों के स्पीकर्स और प्रिसाइडिंग ऑफिसर्स का यह 28वां सम्मेलन लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने, विधायी प्रक्रियाओं में सर्वोत्तम प्रथाओं और संसदीय सहयोग को बढ़ावा देने पर केंद्रित रहेगा। सम्मेलन में ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, यूके, मलेशिया, मालदीव और श्रीलंका सहित कई देशों के शीर्ष संसदीय प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है।
कनाडा और मालदीव की मौजूदगी अहम
विशेषज्ञों के अनुसार, कनाडा, मलेशिया और मालदीव जैसे देशों की भागीदारी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि हाल के वर्षों में इन देशों के साथ भारत के संबंधों में उतार-चढ़ाव देखा गया है। इसके बावजूद बहुपक्षीय मंच के रूप में CSPOC में उनकी सक्रिय भागीदारी लोकतांत्रिक संवाद की मजबूती का संकेत देती है।
क्यों नहीं आएंगे पाकिस्तान और बांग्लादेश?
सूत्र बताते हैं कि बांग्लादेश की संसद फिलहाल निलंबित है, जिसके चलते ऐसे संसदीय मंचों पर उसकी भागीदारी सीमित हो जाती है। वहीं पाकिस्तान की संभावित गैर-हाजिरी की वजह भारत-पाक संबंधों में जारी ठंडापन है। सीमा पार आतंकवाद को लेकर भारत द्वारा द्विपक्षीय संवाद में की गई कटौती का असर राजनीतिक और संसदीय स्तर पर भी दिख रहा है।
नियमों का उल्लंघन नहीं, औपचारिक प्रतिबंध भी नहीं
CSPOC सचिवालय के माध्यम से सम्मेलन की जानकारी सभी सदस्य देशों को दी गई थी और यह आधिकारिक वेबसाइट पर भी प्रकाशित है। किसी देश को औपचारिक रूप से प्रतिबंधित नहीं किया गया है, लेकिन इस्लामाबाद और ढाका से अब तक भागीदारी को लेकर कोई सकारात्मक संकेत नहीं मिले हैं।
कुल मिलाकर, पाकिस्तान और बांग्लादेश की संभावित अनुपस्थिति इस सम्मेलन को कूटनीतिक संदेशों से भरा बनाती है, जबकि भारत की मेजबानी में होने जा रही यह बैठक लोकतांत्रिक मूल्यों और संसदीय सहयोग को आगे बढ़ाने की दिशा में अहम मानी जा रही है।