


लखनऊ। जगतगुरु रामभद्राचार्य एक बार फिर अपने बयानों को लेकर विवादों में आ गए हैं। उनके हालिया वक्तव्य पर शिया मरकजी चांद कमेटी के अध्यक्ष मौलाना सैयद सैफ अब्बास नकवी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। मौलाना सैफ अब्बास ने कहा कि रामभद्राचार्य के बयान समाज को जोड़ने के बजाय बांटने का काम करते हैं, जबकि एक धार्मिक संत का कर्तव्य सामाजिक सौहार्द और एकता को मजबूत करना होना चाहिए।
मौलाना सैफ अब्बास ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि किसी धार्मिक व्यक्ति को राजनीति करनी है तो उसे धार्मिक लिबास त्यागकर खादी कुर्ता-पायजामा पहन लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि धर्म की आड़ में राजनीति करना न तो उचित है और न ही समाज के हित में।
दरअसल, मौलाना सैफ अब्बास नकवी ने जगतगुरु रामभद्राचार्य द्वारा कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को नेता प्रतिपक्ष के पद से हटाने की मांग किए जाने पर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि किसी साधु-संत द्वारा इस प्रकार की राजनीतिक टिप्पणी करना अनुचित है। धार्मिक व्यक्ति का दायित्व समाज को जोड़ने वाली बातें करना है, न कि विवाद और विभाजन को बढ़ावा देना।
मौलाना ने कहा, “अगर कोई साधु विपक्ष के नेता को हटाने की मांग करता है, तो यह धर्म नहीं, बल्कि खुली राजनीति है।” उन्होंने आरोप लगाया कि रामभद्राचार्य के बयान लगातार विवादों को जन्म देते रहे हैं और इससे समाज में तनाव बढ़ता है।
यह पहला अवसर नहीं है जब जगतगुरु रामभद्राचार्य अपने बयानों के कारण विवादों में घिरे हों। इससे पहले भी वे कई बार सुर्खियों में रहे हैं। हाल ही में उन्होंने हिंदुओं को तीन से चार बच्चे पैदा करने की सलाह दी थी। वहीं मेरठ में एक कार्यक्रम के दौरान पश्चिमी उत्तर प्रदेश को “मिनी पाकिस्तान” जैसा बताने वाले बयान पर भी व्यापक विरोध हुआ था।
इसके अलावा, उन्होंने संत प्रेमानंद महाराज पर टिप्पणी करते हुए उनकी विद्वत्ता और चमत्कारिक शक्तियों पर सवाल उठाए थे। आईपीएल में बांग्लादेशी खिलाड़ी को शामिल करने को लेकर अभिनेता शाहरुख खान पर भी उन्होंने टिप्पणी की थी। साथ ही पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर मुसलमानों का पक्ष लेने का आरोप लगाते हुए उन्हें “सिर्फ नाम की मुख्यमंत्री” बताया था।
मौलाना सैफ अब्बास ने कहा कि धार्मिक नेताओं को अपने वक्तव्यों में संयम बरतना चाहिए और समाज में सौहार्द बनाए रखने की दिशा में काम करना चाहिए, न कि राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने में।


