
अहमदाबाद: गुजरात में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एक बार फिर से बड़ी कार्रवाई करते हुए गुजरात भूमि विकास निगम (GLDC) के तत्कालीन फील्ड सुपरवाइजर धीरूभाई बाबाभाई शर्मा की संपत्ति को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया है। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत की गई है।
ईडी के गांधीनगर क्षेत्रीय कार्यालय के अनुसार, धीरूभाई शर्मा की कुल 4.92 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क की गई हैं, जिनमें व्यावसायिक दुकान, आवासीय मकान, कृषि भूमि और नाडियाड स्थित जलाश्रय रिसॉर्ट शामिल हैं।
मनी लॉन्ड्रिंग का पैटर्न पकड़ा गया
जांच के दौरान ईडी ने पाया कि शर्मा ने 1 अप्रैल 2006 से 31 मार्च 2018 के बीच अपनी ज्ञात आय के मुकाबले 8.04 करोड़ रुपये (लगभग 354.56%) की अनुपातहीन संपत्ति जमा की थी। इसके अलावा, उनका परिवार और उनकी कंपनी “मेसर्स जलाश्रय रिजॉर्ट प्राइवेट लिमिटेड” ने सुरक्षित और असुरक्षित ऋण लिया, जिनका भुगतान मुख्य रूप से नकद जमा के माध्यम से किया गया।
ईडी ने कहा कि नकद जमा करके ऋण का भुगतान करने का यह तरीका क्लासिक मनी लॉन्ड्रिंग तकनीक है, जिसमें अवैध स्रोतों से प्राप्त धन को बैंकिंग सिस्टम के माध्यम से फिर वित्तीय लेन-देन में प्रयोग किया जाता है, ताकि इसके स्रोत को छुपाया जा सके।
फंडिंग और हेराफेरी
जलाश्रय रिज़ॉर्ट की स्थापना 2012 में शर्मा के पुत्र और पत्नी द्वारा की गई थी। इसके लिए शुरू में 5.50 करोड़ रुपये का सुरक्षित ऋण और बाद में 2018 में 7.85 करोड़ रुपये का ऋण लिया गया। ईडी ने पाया कि 2015-2020 के दौरान रिसॉर्ट के विकास के लिए 1.19 करोड़ रुपये का असुरक्षित ऋण भी लिया गया।
जांच में यह भी सामने आया कि बैंक खातों में नकद जमा, विभिन्न स्रोतों से धन और परिवार के सदस्यो की हिस्सेदारी के माध्यम से संपत्ति का जटिल वित्तीय लेन-देन किया गया। इसके अतिरिक्त, धीरूभाई शर्मा और उनके परिवार के नाम पर एलआईसी और मैक्स लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसियों के प्रीमियम नकद में भरे गए और उनकी परिपक्वता राशि बाद में निजी बचत खातों में स्थानांतरित की गई।
ईडी के मुताबिक, जांच अभी पूरी नहीं हुई है और यह जारी है। इससे पहले ईडी ने गुजरात के सुरेंद्र नगर के कलेक्टर के खिलाफ भी कार्रवाई की थी।