
अब दवा सिर्फ बीमारी का इलाज ही नहीं करेगी, बल्कि मरीज से संवाद भी करेगी। मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी अनोखी गोली विकसित की है, जिसमें बेहद छोटी चिप (रेडियो फ्रीक्वेंसी एंटीना) लगी है। यह चिप दवा के साथ पेट में जाकर मरीज को संकेत देती है कि गोली सही तरीके से घुल गई है और अपना काम कर रही है।
MIT न्यूज में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा उन मरीजों को मिलेगा, जिन्हें लंबे समय तक नियमित दवाएं लेनी होती हैं। खासकर ट्रांसप्लांट, टीबी और एचआईवी जैसे गंभीर रोगों से जूझ रहे मरीजों के लिए यह खोज बेहद कारगर साबित हो सकती है।
कैप्सूल में फिट होगी चिप
वैज्ञानिकों ने इस चिप को इस तरह डिजाइन किया है कि इसे किसी भी दवा के कैप्सूल में फिट किया जा सकता है। मरीज जैसे ही दवा निगलता है, पेट में पहुंचते ही कैप्सूल का बाहरी हिस्सा घुल जाता है। इसके बाद चिप सक्रिय हो जाती है और रेडियो फ्रीक्वेंसी सिग्नल के जरिए यह जानकारी देती है कि दवा पेट में घुल चुकी है।
खास बात यह है कि यह चिप बायोडिग्रेडेबल है, यानी अपना काम पूरा करने के बाद यह सुरक्षित तरीके से शरीर से बाहर निकल जाती है।
दवा लेने में लापरवाही पर लगेगी रोक
एक्सपर्ट्स का कहना है कि दुनिया भर में लाखों मरीज दवा लेने में लापरवाही बरतते हैं, जिससे बीमारी गंभीर हो जाती है और कई बार जान तक चली जाती है। यह ‘स्मार्ट पिल’ इस समस्या का समाधान बन सकती है, क्योंकि इससे डॉक्टरों और मरीज—दोनों को यह पता चल सकेगा कि दवा सही समय पर ली गई या नहीं।
कैसे काम करती है यह तकनीक
रिसर्चर्स ने इस गोली को जिंक आधारित तकनीक से तैयार किया है। पेट में पहुंचने के करीब 10 मिनट बाद चिप सक्रिय हो जाती है और मरीज-गोली के बीच कम्युनिकेशन शुरू हो जाता है। हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि इस सिग्नल को पकड़ने के लिए मरीज को किसी अतिरिक्त डिवाइस की जरूरत होगी या नहीं।
एक्सपर्ट की राय
MIT में मैकेनिकल इंजीनियरिंग के एसोसिएट प्रोफेसर और ब्रिघम एंड विमेंस हॉस्पिटल के गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट जियोवानी ट्रावेर्सो के अनुसार,
“हमारा लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि मरीजों को सही समय पर सही थेरेपी मिले, जिससे उनका स्वास्थ्य बेहतर हो सके।”
कब आएगी बाजार में
फिलहाल यह तकनीक रिसर्च स्टेज में है और इसे बाजार में कब तक उतारा जाएगा, इसकी कोई आधिकारिक समय-सीमा तय नहीं हुई है। लेकिन मेडिकल साइंस की दुनिया में इसे एक बड़ी क्रांति के तौर पर देखा जा रहा है।