
बीमारी कब और किस रूप में जानलेवा बन जाए, इसका अंदाज़ा लगाना मुश्किल होता है। कई बार मामूली समझे जाने वाले लक्षण भी गंभीर खतरे की चेतावनी होते हैं। वेल्स के स्वानसी शहर से सामने आई एक घटना इसी सच्चाई को उजागर करती है, जहां किडनी स्टोन जैसा दर्द दरअसल जानलेवा सेप्सिस निकला और 48 वर्षीय महिला को अपने हाथ-पैर की आठ उंगलियां गंवानी पड़ीं।
स्वानसी निवासी लुईस मार्शलसे को करीब तीन साल पहले किडनी स्टोन का ऑपरेशन कराना पड़ा था। हाल ही में जब उन्हें फिर से पीठ में उसी तरह का तेज दर्द उठा, तो वह जांच के लिए अस्पताल पहुंचीं। डॉक्टरों ने शुरुआती जांच के बाद इसे छोटा किडनी स्टोन बताया और कहा कि यह अपने आप निकल जाएगा। उन्हें ज्यादा चिंता न करने की सलाह देकर घर भेज दिया गया।
हालांकि घर लौटने के कुछ ही घंटों बाद लुईस की हालत तेजी से बिगड़ने लगी। वह बार-बार बेहोश होने लगीं और उनके हाथ-पैर का रंग काला व बैंगनी होने लगा। परिजन घबरा गए और तुरंत एंबुलेंस बुलाकर उन्हें अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल पहुंचते ही वह बेहोश होकर गिर पड़ीं।
चार दिन बाद जब उन्हें होश आया, तो पता चला कि वह सेप्टिक शॉक की चपेट में थीं। यह किडनी स्टोन नहीं, बल्कि सेप्सिस का बेहद खतरनाक रूप था, जिसमें शरीर संक्रमण के खिलाफ जरूरत से ज्यादा प्रतिक्रिया करने लगता है और अहम अंगों पर असर पड़ता है।
सेप्टिक शॉक क्या है
सेप्टिक शॉक, सेप्सिस की सबसे गंभीर अवस्था मानी जाती है। इसमें बैक्टीरिया, वायरस या फंगल संक्रमण के कारण शरीर में तीव्र सूजन हो जाती है, ब्लड प्रेशर खतरनाक स्तर तक गिर जाता है और दिल, किडनी व दिमाग जैसे अंगों के फेल होने का खतरा बढ़ जाता है। आम भाषा में इसे ‘ब्लड पॉइजनिंग’ भी कहा जाता है।
जान बचाने के लिए काटनी पड़ीं उंगलियां
लुईस की हालत इतनी गंभीर थी कि डॉक्टरों को उनके अहम अंगों को बचाने के लिए हाथ और पैरों में रक्त प्रवाह कम करना पड़ा। इससे बाहरी हिस्सों तक खून नहीं पहुंच पाया और टिश्यू खराब होने लगे। करीब दो हफ्ते बाद डॉक्टरों ने बताया कि दाहिने हाथ और पैरों की कई उंगलियां बचाई नहीं जा सकतीं।
लुईस ने बताया कि ऑपरेशन के दौरान वह होश में थीं और अपनी उंगलियां कटते हुए देख रही थीं। उन्होंने इस अनुभव को किसी डरावनी फिल्म से भी ज्यादा भयावह बताया।
रिकवरी का लंबा और कठिन सफर
लुईस करीब छह हफ्ते तक अस्पताल में भर्ती रहीं। बाद में उन्हें चलने-फिरने, नहाने, खाना बनाने और रोजमर्रा के कामों में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। दाहिने कान से सुनने की क्षमता भी प्रभावित हुई। इसके बाद उन्हें प्रोस्थेटिक लैब भेजा गया, जहां तस्वीरों और तकनीकी मदद से नकली उंगलियां तैयार की गईं।
सेप्सिस कितना खतरनाक
यूके में हर साल लगभग 52 हजार लोगों की मौत सेप्सिस के कारण होती है। रिसर्च के मुताबिक, सेप्सिस से बचने वाले करीब 1 प्रतिशत मरीजों को किसी न किसी अंग को कटवाना पड़ता है।
सेप्सिस के शुरुआती लक्षण
तेज बुखार या ठंड लगना, दिल की धड़कन बढ़ना, सांस तेज चलना, अचानक भ्रम की स्थिति, असहनीय दर्द, त्वचा का ठंडी या चिपचिपी होना और अत्यधिक कमजोरी सेप्सिस के शुरुआती संकेत हो सकते हैं। ऐसे लक्षण दिखते ही तुरंत मेडिकल इमरजेंसी मदद लेना जरूरी है।
इस घटना से सबक
यह मामला बताता है कि शरीर के संकेतों को हल्के में लेना खतरनाक हो सकता है। अचानक तबीयत बिगड़ना, बेहोशी या हाथ-पैर का रंग बदलना गंभीर चेतावनी हो सकती है। समय पर सही जांच और इलाज जान बचा सकता है।
डिस्क्लेमर
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से है। किसी भी बीमारी या इलाज के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह आवश्यक है।