Saturday, January 10

केदारनाथ धाम यात्रा होगी और आसान, बन रही है ट्विन ट्यूब टनल

 

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उत्तराखंड में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने और तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए केदारनाथ धाम तक पहुंच को सुगम बनाने के प्रयास तेज हो गए हैं। केदारनाथ यात्रा वर्षों से कठिन मानी जाती रही है, लेकिन सरकार ने अब यात्रा को सुरक्षित और आसान बनाने के लिए कई योजनाओं की दिशा में काम शुरू किया है।

 

ट्विन ट्यूब टनल प्रोजेक्ट

केदारनाथ धाम की यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं के लिए सुविधा बढ़ाने हेतु कालीमठ के पास चौमासी से सोनप्रयाग तक 7 किलोमीटर लंबी ट्विन ट्यूब टनल बनाने की योजना है। इस टनल से सोनप्रयाग तक डबल कनेक्टिविटी सुनिश्चित होगी। टनल खराब मौसम या आपात स्थिति में वैकल्पिक मार्ग के रूप में भी काम आएगी। योजना के तहत पैदल यात्रियों के लिए डेडिकेटेड फुटपाथ बनाने की संभावना पर भी अध्ययन किया जा रहा है।

 

यात्रियों को मिलेगी बड़ी सुविधा

टनल बनने के बाद श्रद्धालु सोनप्रयाग तक आसानी से पहुंच सकेंगे। लोक निर्माण विभाग के मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर प्रदेश में सड़क कनेक्टिविटी सुधारने की दिशा में काम कर रहे हैं। चौमासी से सोनप्रयाग तक डबल कनेक्टिविटी के साथ रोपवे प्रोजेक्ट भी यात्रियों के अनुभव को और आसान बनाएगा।

 

रोपवे प्रोजेक्ट

सोनप्रयाग से केदारनाथ धाम तक 12.9 किलोमीटर लंबा रोपवे बनाया जाएगा। इसे पूरा होने पर यात्रा का समय 8–9 घंटे से घटकर 36–40 मिनट रह जाएगा। रोपवे में 35 यात्री एक साथ बैठ सकेंगे और प्रति घंटे 1,800 तीर्थयात्रियों को धाम तक पहुंचाया जा सकेगा। यह देश का पहला थी-एस (Tri-Cable) रोपवे होगा, जिसे अडानी ग्रुप 6 वर्षों में तैयार करेगा।

 

सड़क सुधार और ट्रैफिक प्रबंधन

अभी सोनप्रयाग और गौरी कुंड तक नेशनल हाइवे-107 का इस्तेमाल होता है। नई योजना के तहत कालीमठ घाटी में मौजूदा एक-लेन सड़क का चौड़ीकरण कर दो लेन किया जाएगा। इससे टनल चालू होने पर बढ़े ट्रैफिक को संभालने में मदद मिलेगी।

 

भविष्य की तैयारी

सरकार निर्माण से पहले विस्तृत जियोलॉजिकल और हाइड्रोलॉजिकल स्टडी कर रही है, ताकि हिमालयी क्षेत्र में किसी भी अप्रत्याशित स्थिति से बचा जा सके। अधिकारियों के अनुसार टनल, चौड़ी सड़कें और रोपवे मिलकर आने वाले वर्षों में केदारनाथ यात्रा को और अधिक सुरक्षित, सुविधाजनक और तीव्र बनाएंगे। अनुमान है कि वर्ष 2030 तक श्रद्धालुओं की संख्या 25 लाख और 2040 तक 40 लाख तक पहुंच जाएगी।

 

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