
नई दिल्ली: भारत का डिफेंस एक्सपोर्ट पिछले कुछ वर्षों में तेज़ी से बढ़ा है। वैश्विक स्तर पर हथियार निर्यातक देशों में हो रही उथल-पुथल को देखते हुए भारत के पास इस सेक्टर में अपनी ताकत दिखाने का सुनहरा अवसर है। विशेष रूप से ग्लोबल साउथ के देश भारतीय हथियारों के लिए महत्वपूर्ण बाजार बन सकते हैं।
डिफेंस इंडस्ट्री में बदलाव:
भारत का डिफेंस सेक्टर अब आयात पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहा। नीति सुधार, संस्थागत बदलाव और सरकार की प्राथमिकता के चलते यह क्षेत्र अब पूरी तरह कायाकल्प की स्थिति में है। पिछले दशक में खरीद, लाइसेंसिंग, निर्यात नियंत्रण और एफडीआई नीतियों में सुधार ने निजी क्षेत्र को भी शामिल किया है। अब केवल असेंबलिंग नहीं बल्कि पूरा डिफेंस ईकोसिस्टम विकसित किया जा रहा है।
निर्यात और उत्पादन में तेजी:
स्वदेशी हथियारों और उपकरणों का उत्पादन बढ़ रहा है। रक्षा निर्माण में अब बड़ी निजी कंपनियां, एमएसएमई, स्टार्ट-अप्स और छोटी-मध्यम कंपनियां भी शामिल हो रही हैं। इससे उत्पादन क्षमता बढ़ी है और निर्यात आसमान छू रहा है।
वैश्विक अवसर:
जैसे-जैसे विश्व में सुरक्षा चिंताएं बढ़ रही हैं, डिफेंस उत्पादों की मांग भी बढ़ रही है। भारत भरोसेमंद सप्लायर के रूप में उभर सकता है। स्वदेशी उत्पादन से आयात पर निर्भरता कम होगी, करंट अकाउंट में सुधार होगा और विदेशी मुद्रा की बचत होगी। इसके अलावा, डिफेंस निर्यात से तकनीकी क्षमता और औद्योगिक विकास में भी मदद मिलेगी।
बजट 2026 और प्रोत्साहन:
1 फरवरी को पेश होने वाले बजट में सरकार स्वदेशी हाई-टेक डिफेंस कैपिटल गुड्स और उपकरणों के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए लगभग ₹23,000 करोड़ का प्रोत्साहन पैकेज पेश कर सकती है। इससे टनल बोरिंग मशीन, क्रेन, एडवांस्ड सेंसर और ऑटोमोटिव पार्ट्स जैसे हाई-एंड उत्पादों का स्थानीय उत्पादन बढ़ेगा और चीन समेत अन्य देशों पर निर्भरता कम होगी।
दीर्घकालिक लाभ:
MSMEs, टियर-2 और टियर-3 सप्लायर वैश्विक और घरेलू सप्लाई चेन में शामिल हो रहे हैं। स्टार्ट-अप्स ड्रोन, AI-एनेबल्ड सर्विलांस और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर में कदम रख रहे हैं। पूरे सेक्टर में स्केल, इनोवेशन और कॉस्ट कंट्रोल तभी संभव है जब हजारों कंपनियां पूरी वैल्यू चेन में भाग लें।
भारत की वैश्विक स्थिति:
भारत अब एक भरोसेमंद डिफेंस पार्टनर के रूप में उभर सकता है। प्रशिक्षण, फ्लेक्सिबल फाइनेंसिंग और लॉन्ग-टर्म मेंटेनेंस सपोर्ट से यह सेक्टर वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूती हासिल कर सकता है।
इस तरह डिफेंस उत्पादन और निर्यात में यह तेजी न केवल आर्थिक रूप से लाभकारी है, बल्कि भारत को वैश्विक रणनीतिक नेटवर्क का हिस्सा भी बनाएगी और देश की सुरक्षा को मजबूत करेगी।