
नई दिल्ली: भारत और चीन के बीच रिश्तों में नरमी दिख रही है। व्यापारिक दृष्टिकोण से दोनों देश एक-दूसरे के करीब आने लगे हैं। पिछले साल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ के बाद यह नजदीकियां और बढ़ गई थीं। अब भारत सरकार चीन की कंपनियों को सरकारी ठेकों में भाग लेने की अनुमति देने पर विचार कर रही है।
सूत्रों के अनुसार, वित्त मंत्रालय एक प्रस्ताव पर काम कर रहा है, जिसके तहत 2020 में लागू किए गए नियम हटाए जा सकते हैं। इन नियमों के अनुसार चीनी कंपनियों को सरकारी टेंडरों में हिस्सा लेने से पहले सरकारी पैनल में नाम दर्ज कराना और सुरक्षा मंजूरी लेना आवश्यक था। इन प्रतिबंधों की वजह से चीनी कंपनियों को सरकारी परियोजनाओं से लगभग 700-750 अरब डॉलर के ठेकों से वंचित रहना पड़ा।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि प्रस्ताव अंतिम मंजूरी के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजा जाएगा। कई मंत्रालयों ने भी अटके हुए प्रोजेक्ट्स और सप्लाई की कमी को देखते हुए नियमों में ढील देने की मांग की है।
विशेष रूप से पावर सेक्टर को सबसे अधिक नुकसान हुआ है। चीनी उपकरणों पर पाबंदियों के कारण भारत की थर्मल पावर उत्पादन क्षमता को बढ़ाने की योजना धीमी पड़ गई थी। पूर्व कैबिनेट सचिव राजीव गौबा की अध्यक्षता वाली उच्च-स्तरीय समिति ने नियमों में नरमी देने का समर्थन किया है।
यह कदम ऐसे समय में उठाया जा रहा है जब भारत और चीन अपने संबंध सामान्य करने के प्रयास कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी पिछले साल सात साल में पहली बार चीन गए थे और दोनों पक्षों ने व्यावसायिक सहयोग को बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की थी। इसके बावजूद सावधानी बरती जा रही है और चीनी कंपनियों पर प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) से जुड़ी पाबंदियां अभी भी लागू रहेंगी।