
भोपाल। मध्य प्रदेश के नगर विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय इन दिनों विवादों में हैं, जिनकी वजह इंदौर में दूषित जल की घटना के बाद दिया गया विवादित बयान बना था। इस बयान के बाद वह अचानक गुरुवार को भोपाल पहुंचे और पार्टी कार्यालय में अपनी मीटिंग के लिए गए। दिलचस्प बात यह रही कि इस मीटिंग का माहौल बहुत अलग था।
कमांडो सुरक्षा के घेरे में मीटिंग
कैलाश विजयवर्गीय और पार्टी के संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा के बीच यह मीटिंग भोपाल स्थित पार्टी कार्यालय के खुले पार्क में हुई। मीटिंग के दौरान पार्क में सिर्फ दोनों नेता ही मौजूद थे, और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। पूरे पार्क के चारों ओर सुरक्षाकर्मियों का पहरा था, और किसी को भी नजदीक जाने की इजाजत नहीं थी। मीटिंग के बाद कैलाश विजयवर्गीय ने मीडिया से भी कोई बात नहीं की, जिससे इस बैठक को लेकर कई तरह की अटकलें लगने लगीं।
पार्टी ने साधी चुप्पी
बीजेपी ने इस मीटिंग पर चुप्पी साधी हुई है और कहा कि यह कैलाश विजयवर्गीय का नियमित कार्यक्रम था, जिसमें वह पार्टी कार्यकर्ताओं की समस्याएं सुनने के लिए आए थे। हालांकि, यह मीटिंग एक संगठन महामंत्री के साथ हुई थी, और ऐसे में कई सवाल खड़े हो रहे हैं कि यह मुलाकात केवल पार्टी कार्यकर्ताओं से मिलकर समस्याएं सुनने का हिस्सा थी, या कुछ और?
सीक्रेट संदेश की अटकलें
कैलाश विजयवर्गीय की इस मीटिंग की गुप्त प्रकृति ने कई अटकलों को जन्म दिया है। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि इस मुलाकात के जरिए बीजेपी के आलाकमान का कोई खास संदेश कैलाश विजयवर्गीय तक पहुंचाया गया हो सकता है। उनका बयान पार्टी के लिए राष्ट्रीय स्तर पर विवाद का कारण बना है, और इस घटना के बाद उनकी राजनीतिक स्थिति भी चर्चा का विषय बन गई है। साथ ही, भागीरथपुरा में हुई 18 मौतों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं, जो कि कैलाश विजयवर्गीय के विधानसभा क्षेत्र में आईं हैं।
मृतकों की संख्या और राजनीतिक दबाव
भागीरथपुरा में हुई मौतों की संख्या अब 18 तक पहुंच चुकी है, हालांकि स्थानीय लोगों के अनुसार यह संख्या और भी अधिक हो सकती है। इस घटना के बाद विजयवर्गीय की स्थिति पार्टी में कमजोर मानी जा रही है, और उनके विभाग की ही घटना के कारण सरकार में उनके समन्वय को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
नई परंपरा का पालन करते हुए
हालांकि, यह भी सही है कि मध्य प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने एक नई परंपरा की शुरुआत की है, जिसके तहत मंत्री पार्टी कार्यालय में बैठकर कार्यकर्ताओं से मिलते हैं और उनकी समस्याएं सुनते हैं। लेकिन कैलाश विजयवर्गीय की यह मीटिंग कार्यकर्ताओं के साथ नहीं, बल्कि संगठन महासचिव के साथ हुई, जिससे यह सवाल उठ रहे हैं कि कहीं यह मुलाकात आलाकमान के विशेष निर्देश पर तो नहीं हुई थी।
कैलाश विजयवर्गीय की भोपाल में हुई मीटिंग को लेकर राजनीतिक हलकों में गहरी चर्चा जारी है, और यह देखना होगा कि आगे इस पर पार्टी और मंत्री का क्या रुख रहेगा।