
नई दिल्ली: गाइनेकोलॉजिस्ट डॉक्टर समरा मसूद ने हाल ही में नई माताओं को एक बेहद महत्वपूर्ण चेतावनी दी है। डॉक्टर का कहना है कि डिलीवरी के बाद कुछ नई माताएं अनजाने में एक ऐसी गलती कर बैठती हैं, जो उनके शरीर पर लंबी अवधि तक नकारात्मक असर डाल सकती है।
डिलीवरी के तुरंत बाद महिलाओं का शरीर काफी कमजोर हो जाता है। ऐसे में सही देखभाल और पोषण पर ध्यान देना बेहद जरूरी होता है, ताकि शरीर जल्दी और बेहतर तरीके से रिकवर कर सके। लेकिन कई नई माताएं इस दौरान पूरी तरह बेडरेस्ट करने का निर्णय ले लेती हैं, जो विशेषज्ञों के अनुसार सेहत के लिए सही नहीं है।
डॉक्टर मसूद ने बताया कि डिलीवरी के बाद लंबे समय तक एक ही पोज़िशन में लेटे रहने से मांसपेशियां अकड़ जाती हैं। इससे पीठ दर्द, हाथ-पैरों में दर्द और शरीर में कमजोरी जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। इसके अलावा, लंबे समय तक लेटे रहने से पैरों में ब्लड क्लॉट यानी खून का थक्का जमने का खतरा भी बढ़ जाता है।
हल्की वॉक है जरूरी
डॉक्टर मसूद का कहना है कि चाहे नॉर्मल डिलीवरी हुई हो या सिजेरियन, डिलीवरी के अगले ही दिन हल्की वॉक शुरू कर देना चाहिए। यह पूरी तरह से बेडरेस्ट की जगह नहीं लेता, लेकिन शरीर के रक्त संचार और मांसपेशियों की लचक बनाए रखने में मदद करता है। हालांकि, नई माताओं को घर के भारी काम जैसे आटा गूंथना, झाड़ू-पोंछा करना आदि कम से कम एक से डेढ़ महीने तक नहीं करना चाहिए।
हल्की वॉक करने से दिल का स्वास्थ्य बेहतर रहता है, सिरदर्द कम होता है, ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है और मानसिक व शारीरिक ऊर्जा भी बनी रहती है। इसके अलावा सुबह की धूप में वॉक करना नई माताओं के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है।
सावधानियाँ: नई माताओं को हमेशा डॉक्टर की सलाह अनुसार वॉक और व्यायाम करना चाहिए। डिलीवरी के तुरंत बाद कोई भी गतिविधि शुरू करने से पहले स्वास्थ्य विशेषज्ञ की राय लेना जरूरी है।