
नई दिल्ली: प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने टाटा स्टील, JSW स्टील, सरकारी कंपनी SAIL और अन्य 25 कंपनियों पर स्टील की बिक्री की कीमतें तय करने में मिलीभगत करने का आरोप लगाया है। इस खुलासे से कंपनियों और उनके शीर्ष अधिकारियों पर भारी जुर्माने का खतरा मंडरा रहा है।
रॉयटर्स ने एक गोपनीय दस्तावेज का हवाला देते हुए बताया कि CCI ने 2015 से 2023 के बीच कीमतों में हेरफेर करने के लिए 56 शीर्ष अधिकारियों को दोषी पाया है। इनमें JSW के एमडी सज्जन जिंदल, टाटा स्टील के सीईओ टी.वी. नरेंद्रन और SAIL के चार पूर्व प्रेजिडेंट्स शामिल हैं।
जांच का इतिहास
यह जांच 2021 में शुरू हुई थी। कुछ बिल्डरों ने आरोप लगाया था कि नौ कंपनियां मिलकर स्टील की आपूर्ति सीमित कर रही थीं और कीमतें बढ़ा रही थीं। इसके बाद CCI ने छोटी स्टील कंपनियों पर छापे मारे और जांच का दायरा बढ़ाकर 31 कंपनियों और कई अधिकारियों तक कर दिया।
CCI के नियमों के तहत कार्टेल जैसी गतिविधियों से जुड़े मामलों का विवरण तब तक सार्वजनिक नहीं किया जाता जब तक अंतिम निर्णय न आ जाए। आदेश में कहा गया है कि कंपनियों और उनके अधिकारियों का आचरण भारतीय प्रतिस्पर्धा कानून के उल्लंघन में पाया गया। अब उन्हें अपनी आपत्तियां या टिप्पणियां प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा, उसके बाद CCI अंतिम आदेश जारी करेगा।
भारतीय स्टील बाजार की पृष्ठभूमि
भारत दुनिया में कच्चे स्टील का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है। बढ़ते बुनियादी ढांचे के खर्च के कारण स्टील की मांग लगातार बढ़ रही है। मार्च 2025 में समाप्त वित्त वर्ष में JSW स्टील का राजस्व 14.2 बिलियन डॉलर और टाटा स्टील का 14.7 बिलियन डॉलर रहा। बाजार हिस्सेदारी के अनुसार JSW स्टील की 17.5%, टाटा स्टील की 13.3% और SAIL की 10% है।
CCI को आरोपित कंपनियों पर हर वर्ष के लिए उनके लाभ का तीन गुना या टर्नओवर का 10% (जो अधिक हो) तक का जुर्माना लगाने का अधिकार है। व्यक्तिगत अधिकारियों पर भी जुर्माना लगाया जा सकता है।