
पटना।
बिहार की राजनीति में कई मोड़ आए हैं, लेकिन मार्च 2022 का वह विवाद आज भी याद किया जाता है, जब एक डीएसपी के तबादले को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) विजय कुमार सिन्हा के बीच तीखी बहस हुई। यह मामला सदन में हंगामे और राजनीतिक भूचाल का कारण बना।
क्यों उठा था विवाद
घटना की शुरुआत 4 फरवरी 2022 से हुई थी। लखीसराय में सरस्वती पूजा के अवसर पर आयोजित संगीत कार्यक्रम में कुछ युवकों द्वारा हथियार लहराने का आरोप लगा। पुलिस ने इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया, जिन्हें बाद में न्यायिक हिरासत में भेजा गया।
स्पीकर विजय कुमार सिन्हा ने इस पर नाराजगी जताई और आरोप लगाया कि डीएसपी रंजन कुमार और अन्य पुलिस अधिकारी उनके साथ बदसलूकी कर रहे हैं। उन्होंने पुलिस अधिकारियों को तलब कर मामले की जानकारी ली, लेकिन उनका विरोध झेलते हुए डीजीपी ने कोई कार्रवाई नहीं की।
सदन में हंगामा
मार्च 2022 में विधानसभा सत्र के दौरान भाजपा और विपक्ष ने इस मुद्दे को बार-बार उठाया। इस पर नाराज होकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सदन में पहुंचे और गुस्से में स्पीकर को कड़ी लहजे में फटकार लगाई। उन्होंने सवाल किया कि सदन में जांच रिपोर्ट मांगने का अधिकार क्या सरकार या सदन का नहीं है? इस दौरान सदस्यों की हैरानी बढ़ गई और विवाद और भी उलझ गया।
राजनीतिक दबाव और समाधान
बिहार एनडीए की किरकिरी से बचने के लिए अगले दिन नीतीश कुमार, विजय सिन्हा और वरिष्ठ नेताओं की गोपनीय बैठक हुई। बैठक के बाद विवाद शिथिल हुआ और नीतीश कुमार ने डीएसपी रंजन कुमार को हटाकर उनकी जगह सैयद इमरान मसूद को तैनात किया।
अंतिम फैसला
इस विवाद में स्पीकर विजय कुमार सिन्हा की मांग पूरी हुई। डीएसपी को हटाया गया और मामले को शांत करने की कोशिश हुई। इस फैसले से यह स्पष्ट हुआ कि स्पीकर के हस्तक्षेप और दबाव के सामने मुख्यमंत्री को झुकना पड़ा।
राजनीतिक सबक
यह घटना बिहार की राजनीति में शक्ति संतुलन और विधानसभा के संचालन में सदन की गरिमा और प्रशासनिक निर्णयों पर राजनीतिक हस्तक्षेप की मिसाल बन गई।