Thursday, January 1

राम के आदर्शों पर चला भारत का पराक्रम, ऑपरेशन सिंदूर में दिखाई मर्यादा और शक्ति का संतुलन: राजनाथ सिंह

 

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अयोध्या। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भगवान राम केवल करुणा और विनम्रता के प्रतीक नहीं हैं, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर अधर्म के विनाशक भी हैं। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने भगवान राम के इन्हीं आदर्शों को आत्मसात करते हुए कार्य किया—संयम के साथ, लेकिन दृढ़ संकल्प और शक्ति के साथ।

 

रामलला के विग्रह की प्राण-प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ के अवसर पर अयोध्या पहुंचे रक्षा मंत्री ने राम मंदिर परिसर स्थित अन्नपूर्णा मंदिर में धर्मध्वजा फहराने के बाद आयोजित सभा को संबोधित किया। उन्होंने राम मंदिर आंदोलन को भारत के सभ्यतागत संघर्ष और भविष्य की नींव रखने वाला एक महान ऐतिहासिक अध्याय बताया।

 

‘भगवा ध्वज हमारी सभ्यता की निरंतरता का प्रतीक’

 

राजनाथ सिंह ने कहा कि विदेशी आक्रमणकारियों द्वारा सनातन परंपराओं को मिटाने के बार-बार किए गए प्रयासों के बावजूद, राम मंदिर पर लहराता भगवा ध्वज भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक निरंतरता का संदेश देता है। यह ध्वज बताता है कि भारत की आत्मा अडिग रही है और आगे भी रहेगी।

 

‘राम विनम्र भी हैं, दुष्टों के संहारक भी’

 

ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा,

“राम विनम्र हैं, राम गुणी हैं, राम दयालु हैं। लेकिन जब आवश्यकता पड़ती है, तब रामजी दुष्टों के संहारक की भूमिका भी निभाते हैं। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने भगवान राम की उसी प्रेरणा से कार्य किया।”

 

आतंक के विरुद्ध निर्णायक जवाब

 

गौरतलब है कि 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पर्यटकों पर हुए आतंकी हमले के जवाब में भारत ने 6 मई की रात ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में स्थित नौ आतंकी शिविरों पर सटीक सैन्य कार्रवाई की। इस कार्रवाई में कम से कम 100 आतंकवादी मारे गए। पाकिस्तान की जवाबी कार्रवाई के बाद भारतीय सेना ने कई महत्वपूर्ण पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों को भी भारी नुकसान पहुंचाया।

 

‘हमारा लक्ष्य संहार नहीं, अधर्म का अंत था’

 

राजनाथ सिंह ने कहा,

“जैसे भगवान राम का उद्देश्य रावण का वध नहीं, बल्कि अधर्म का अंत था, वैसे ही हमारा लक्ष्य भी आतंकियों और उनके आकाओं को सबक सिखाना था। हमने वही किया—मर्यादा में रहकर, लेकिन पूरी शक्ति के साथ।”

 

उन्होंने कहा कि भगवान राम किसी ग्रंथ का मात्र पात्र नहीं हैं, बल्कि एक जीवंत नैतिक शक्ति हैं, जो कर्तव्य, संयम और नैतिक दुविधाओं के क्षणों में समाज और राष्ट्र का मार्गदर्शन करती हैं।

 

 

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