Monday, January 26

रेलवे या हाईवे! बजट 2026-27 में किसे मिलेगा ज्यादा पैसा?

 

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नई दिल्ली: अगले वित्त वर्ष के बजट में रेलवे को ज्यादा प्राथमिकता मिलने की संभावना है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की योजना के तहत रेलवे का बजट इस बार लगभग 2.7 लाख करोड़ रुपये रखा जा सकता है, जो इस वित्त वर्ष के 2.5 लाख करोड़ रुपये से थोड़ा ज्यादा है।

 

रेलवे को बढ़ा हुआ बजट मिलने का कारण है नई रेल लाइनों का विस्तार, मौजूदा लाइनों का मल्टी-ट्रैक करना, ब्रॉड-गेज नेटवर्क का इलेक्ट्रिफिकेशन और नई ट्रेनों, वैगनों व लोकोमोटिव की खरीद। रेलवे अधिकारी उम्मीद कर रहे हैं कि नए प्रोजेक्ट्स और तीसरे साल के खर्च को ध्यान में रखते हुए वित्त वर्ष 2026-27 में उन्हें पर्याप्त फंड मिलेगा।

 

हाईवे सेक्टर का हाल:

वहीं, हाईवे सेक्टर में पिछले कुछ वर्षों में पर्याप्त निवेश हो चुका है। नए प्रोजेक्ट्स की मंजूरी धीमी पड़ने से अगले साल बजट में केवल मामूली वृद्धि की संभावना है। उदाहरण के लिए, 2026 तक 10,000 किलोमीटर हाईवे बनाने का लक्ष्य था, लेकिन अब तक केवल लगभग 2,000 किलोमीटर प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिली है।

 

कैपेक्स और निवेश:

सरकार के कैपेक्स (पूंजीगत व्यय) को बढ़ावा देने की कोशिशें जारी हैं। अप्रैल से अक्टूबर 2025 तक कैपेक्स 13% बढ़कर 6.7 लाख करोड़ रुपये हो गया। निजी कंपनियों की धीमी निवेश दर को देखते हुए सरकार ने रेलवे और इन्फ्रास्ट्रक्चर में खर्च बढ़ाने का निर्णय लिया है।

 

इसके अलावा कुछ राज्यों में खेती को लाभ पहुंचाने के लिए नहरों का जाल मजबूत करने पर भी विचार हो रहा है। इससे इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास और रोजगार दोनों को बढ़ावा मिलेगा।

 

क्यों रेलवे को मिली प्राथमिकता:

रेलवे देश के कोने-कोने तक लोगों और माल को सबसे सस्ते और सुलभ तरीके से पहुंचाने का जरिया है। नई लाइनों और विद्युतीकरण से ट्रेनों की रफ्तार बढ़ेगी, कार्गो मूवमेंट तेज होगा और व्यापार को लाभ मिलेगा। यही कारण है कि इस बार बजट में रेलवे को हाईवे की तुलना में अधिक पैसा मिलने की संभावना जताई जा रही है।

 

 

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