Thursday, May 14

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मोबाइल टॉर्च की रोशनी में इलाज: गोपालगंज सदर अस्पताल में उजागर हुई स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली


बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था की हकीकत एक बार फिर सामने आ गई है। गोपालगंज स्थित मॉडल सदर अस्पताल, जिसे जिले का सबसे बड़ा और आधुनिक अस्पताल बताया जाता है, आज खुद “बीमार” नजर आ रहा है। करोड़ों रुपये की लागत से बने भव्य भवन और अत्याधुनिक मशीनों के बावजूद यहां बुनियादी सुविधा—बिजली—का घोर अभाव है। हालात इतने गंभीर हैं कि बिजली गुल होते ही डॉक्टरों को मोबाइल फोन की टॉर्च जलाकर मरीजों का इलाज करना पड़ रहा है।

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सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो ने पूरे सिस्टम की पोल खोल दी है। वीडियो में साफ दिखाई देता है कि अस्पताल के बहुमंजिला भवन में घना अंधेरा पसरा हुआ है। इमरजेंसी वार्ड से लेकर महिला एवं शिशु वार्ड तक बिजली पूरी तरह ठप है। स्वास्थ्यकर्मी मोबाइल की फ्लैशलाइट में इंजेक्शन लगा रहे हैं और उसी रोशनी में पर्चियां लिखने को मजबूर हैं।

जानकारी के मुताबिक, यह समस्या किसी एक दिन की नहीं है। एक ही सप्ताह में दूसरी बार घंटों तक अस्पताल की बिजली ठप रही। हैरानी की बात यह है कि इतने बड़े मॉडल अस्पताल में न तो पर्याप्त जनरेटर बैकअप है और न ही वैकल्पिक बिजली व्यवस्था। बिजली कटते ही पूरा अस्पताल संकट में आ जाता है और गंभीर मरीजों की जान पर बन आती है।

मरीजों के परिजनों का गुस्सा और दर्द साफ झलक रहा है। तीमारदार इरफान अली गुड्डू का कहना है, “हम मरीज को लेकर आए तो पूरा अस्पताल अंधेरे में डूबा था। डॉक्टर मोबाइल की लाइट में पर्ची लिख रहे थे और इंजेक्शन लगाए जा रहे थे। करोड़ों की इमारत का क्या फायदा, जब इलाज के लिए बिजली ही नहीं है?”
वहीं, बसंत सिंह नामक एक अन्य तीमारदार ने बताया कि तकनीशियन बार-बार समस्या ठीक करने की कोशिश करते हैं, लेकिन ट्रिपिंग और स्थायी व्यवस्था के अभाव में हालात जस के तस बने रहते हैं।

इस पूरे मामले को और भी गंभीर बनाता है यह तथ्य कि गोपालगंज जिला बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत का गृह जिला है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा सुधार के बड़े-बड़े दावों के बीच, मुख्य सचिव के अपने जिले के अस्पताल की यह दुर्दशा सरकारी दावों की सच्चाई उजागर करती है।

दूसरों का इलाज करने वाला यह मॉडल सदर अस्पताल आज खुद इलाज का मोहताज है। सवाल यह है कि क्या इस तस्वीर के सामने आने के बाद जिम्मेदारों की नींद टूटेगी, या फिर मरीजों को यूं ही मोबाइल टॉर्च की रोशनी में इलाज कराने के लिए मजबूर होना पड़ेगा?

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