
नई दिल्ली: हिंदुजा ग्रुप के निवेश वाले प्राइवेट बैंक इंडसइंड बैंक की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय (MCA) ने गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (SFIO) को बैंक की वित्तीय अनियमितताओं की जांच का आदेश दिया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब मुंबई पुलिस अपनी प्रारंभिक जांच बंद करने की योजना बना रही थी।
क्या है मामला?
सरकार ने कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 143(12) के तहत बैंक के वैधानिक ऑडिटर द्वारा दायर ADT-4 फॉर्म का हवाला दिया। इन फॉर्मों में वित्तीय वर्ष 2015-16 से 2023-24 के दौरान लगभग ₹1,959.78 करोड़ की लेखांकन विसंगतियों का खुलासा हुआ था। रिपोर्ट में आंतरिक नियंत्रणों में कमजोरी और सुधारात्मक कार्रवाई की आवश्यकता बताई गई थी।
बैंक की फोरेंसिक निगरानी रिपोर्टों और ऑडिट रिपोर्टों को भी ध्यान में रखा गया। SFIO इस मामले में खातों में हेराफेरी, फर्जी खाते, संपत्ति का गलत वर्गीकरण और अन्य वित्तीय गड़बड़ियों की पूरी जांच करेगा। साथ ही संबंधित-पक्ष लेनदेन, ऋण और निवेशों से जुड़े लेनदेन की भी बारीकी से जांच की जाएगी।
मुंबई पुलिस की स्थिति
मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने कहा कि अगस्त से चल रही प्रारंभिक जांच में फंड की हेराफेरी या डायवर्जन का कोई सबूत नहीं मिला है। एजेंसी ने FIR दर्ज करने की आवश्यकता नहीं पाई, लेकिन जांच बंद करने से पहले RBI से स्पष्टीकरण मांगा गया।
फंड की हेराफेरी का खुलासा
हिंदुजा ग्रुप प्रमोटेड बैंक ने मार्च में अपने डेरिवेटिव पोर्टफोलियो में ₹1,979 करोड़ की कमी और ₹674 करोड़ की गलत बुकिंग की जानकारी दी थी। इसके अलावा ₹595 करोड़ को अन्य संपत्तियों के तहत अप्रमाणित शेष दिखाया गया और ₹172.6 करोड़ को शुल्क आय के रूप में गलत वर्गीकृत किया गया। बैंक के अनुसार इन मुद्दों का शुद्ध संपत्ति पर 2.35% प्रभाव पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है: SFIO की जांच से बैंकिंग प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ेगी और भविष्य में ऐसे वित्तीय अनियमितताओं को रोका जा सकेगा।