
नई दिल्ली।
भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को देश से अलग करने की एक खतरनाक साजिश सामने आई है। इसके पीछे पाकिस्तान, चीन और बांग्लादेश के कट्टरपंथी संगठन मुख्य भूमिका निभा रहे हैं। इस साजिश में भारत-विरोधी गतिविधियों को भड़काने और उग्रवादी नेताओं को बांग्लादेश में पनाह देने की कोशिश की जा रही है।
उल्फा चीफ को बांग्लादेश में लाने की कोशिश
सूत्रों के अनुसार, चीन में छिपे उल्फा के सरगना परेश बरुआ को बांग्लादेश में स्थापित करने की कोशिश में पाकिस्तान जुटा हुआ है। पाकिस्तान को उम्मीद है कि बांग्लादेश में सक्रिय कट्टरपंथी संगठन, जैसे जमात-ए-इस्लामी, आने वाले चुनावों में जीत हासिल करने के बाद भारत-विरोधी गतिविधियों में सहयोग करेंगे।
हाल ही में, बांग्लादेश के एक छात्र नेता ने ‘सेवन सिस्टर्स’ को भारत से अलग करने की धमकी भी दी, जिसे लेकर भारतीय विदेश मंत्रालय ने बांग्लादेश के उच्चायुक्त रियाज हमीदुल्लाह को फटकार लगाई और ऐसी ताकतों पर नियंत्रण रखने की चेतावनी दी।
चीन और पाकिस्तान का हाथ
परेश बरुआ पर आरोप है कि 2004 में उसने बांग्लादेश के चटगांव मार्ग से हथियार भेजने की कोशिश की थी, जिसे नाकाम किया गया। इस साजिश में चीन के युन्नान प्रांत का भी सहयोग सामने आया है।
पाकिस्तान को भरोसा है कि आगामी बांग्लादेश चुनावों में उसकी पसंदीदा सरकार बनने के बाद भारत-विरोधी उग्रवादी संगठनों का संचालन और आसान हो जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार, पाकिस्तान ने पहले भी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी और जमात-ए-इस्लामी सरकार के दौरान ऐसी कोशिशें की थीं।
बांग्लादेश में बढ़ता कट्टरपंथी दबदबा
बांग्लादेश में कथित छात्र आंदोलनों के माध्यम से कट्टरपंथी ताकतों का प्रभाव बढ़ रहा है। हालिया घटनाओं में हसनत अब्दुल्लाह नामक नेता ने सार्वजनिक रूप से भारत-विरोधी बयान दिए और पूर्वोत्तर राज्यों को ‘सेवन सिस्टर्स’ के रूप में अलग करने की धमकी दी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह साजिश सिर्फ भौगोलिक सीमा तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता के लिए गंभीर खतरा है। इस मामले में कूटनीतिक और सुरक्षा उपायों को सख्ती से लागू करने की आवश्यकता है।
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