कच्ची उम्र में प्यार-दुलार की कमी, टूटता बचपन और छूटता घर घर छोड़ने को मजबूर हो रहे 8 से 12 साल के बच्चे, चौंकाते हैं पुलिस के आंकड़े
नई दिल्ली।
आठ से बारह वर्ष की उम्र—जिसे बचपन की सबसे संवेदनशील अवस्था माना जाता है—आज उपेक्षा, दबाव और भावनात्मक दूरी के बोझ तले दबती जा रही है। इसी का नतीजा है कि इस नाजुक उम्र में बच्चे घर छोड़ने जैसा कठोर कदम उठाने को मजबूर हो रहे हैं। दिल्ली पुलिस के आंकड़े इस कड़वी सच्चाई की गवाही देते हैं।
पिछले 11 वर्षों में 8 से 12 वर्ष की आयु के 6,555 बच्चे लापता हुए, जिनमें से 6,166 बच्चों को खोज लिया गया, लेकिन अब भी 389 बच्चे अपने परिवारों से दूर हैं। इनमें 257 लड़के और 132 लड़कियां शामिल हैं।
लड़कों की संख्या अधिक
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, इस आयु वर्ग में लापता होने वाले बच्चों में लड़कों की संख्या कहीं अधिक है। बीते 11 वर्षों में 4,547 लड़के और 2,008 लड़कियां घर से गायब हुईं। यह अनुपात लगभग हर साल बना रहा।
2025 में सबसे ज्यादा अनट्रेस बच्चे
सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि 2025 में 82 बच्चे अब...










