चाबहार से कश्मीर तक: ईरान में विद्रोह ने बढ़ाई भारत की चिंता
ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शनों और राजनीतिक अस्थिरता से भारत की चिंता बढ़ गई है। ईरान भारत के लिए मध्य एशिया तक का प्रवेश द्वार है और चाबहार बंदरगाह के माध्यम से व्यापार और रणनीतिक कनेक्टिविटी का अहम जरिया भी। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ईरान में सत्ता परिवर्तन होता है या मौजूदा शासन कमजोर पड़ता है, तो सीधे तौर पर भारत के हितों को नुकसान हो सकता है और पाकिस्तान-चीन को रणनीतिक बढ़त मिल सकती है।
भारत-ईरान संबंधों का भू-रणनीतिक महत्व
भारत और ईरान के संबंध कभी वैचारिक नहीं रहे, बल्कि भूगोल, व्यापार और सामरिक संतुलन पर आधारित रहे हैं। पाकिस्तान द्वारा भारत के लिए अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक जमीनी रास्ते बंद होने के कारण ईरान भारत का पश्चिम की ओर एकमात्र व्यवहार्य गलियारा रहा है। इस गलियारे के माध्यम से भारत ने अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक सड़क और रेल नेटवर्क के जरिए पहुंच बनाई है।
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