
रायपुर: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने 2004 के धमतरी रेप मामले में 22 साल बाद फैसला सुनाया है। हाई कोर्ट ने निचली अदालत द्वारा दुष्कर्म के लिए दोषी ठहराए गए आरोपी की सात साल की सजा घटाकर तीन साल छह महीने कर दी और पूरे मामले को रेप का प्रयास (Attempt to Rape) मान लिया।
कोर्ट ने सजा बदलने का आधार बताया
कोर्ट ने कहा कि घटना के दौरान पूर्ण पेनिट्रेशन नहीं हुआ था, इसलिए इसे रेप नहीं, बल्कि रेप की कोशिश माना जाएगा। मेडिकल जांच के अनुसार पीड़िता की हाइमन फटी नहीं थी, लेकिन आरोपी ने एक उंगली का सिरा वजाइना में डाला था, जिससे आंशिक पेनिट्रेशन की संभावना मानी गई। इसी आधार पर कोर्ट ने सजा घटाई।
22 साल पुराना मामला
2004 में धमतरी जिले में युवती के साथ हुई इस घटना में ट्रायल कोर्ट ने 2005 में आरोपी को रेप का दोषी मानते हुए 7 साल की सजा सुनाई थी। आरोपी ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी।
मेडिकल रिपोर्ट और सबूतों की व्याख्या
कोर्ट ने कहा कि इंडिसेंट असॉल्ट को अक्सर रेप की कोशिशों में बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जाता है। इस मामले में पीड़िता की हाइमन सही सलामत थी और कोई पक्के निशान नहीं थे। क्रॉस-एग्जामिनेशन के दौरान पीड़िता ने बयान दिया कि आरोपी ने अपना निजी अंग उसके अतरंगी अंग पर रखा, लेकिन पेनिट्रेशन नहीं किया। इसलिए कोर्ट ने यह निर्णय लिया कि अपराध रेप की कोशिश का बनता है।
अदालत ने आरोपी को आदेश दिया कि वह दो महीने के अंदर जेल में सरेंडर करे और शेष सजा पूरी करे।
इस मामले में आरोपी पक्ष के वकील राहिल अरुण कोचर और लीकेश कुमार, जबकि पीड़िता के पक्ष से स्टेट एडवोकेट मनीष कश्यप पेश थे।
