
उपशीर्षक:
बजट सत्र से लागू होगा नया नियम, सदन चलने के दौरान ही दर्ज होगी उपस्थिति
नई दिल्ली।
लोकसभा की कार्यवाही को अधिक अनुशासित, पारदर्शी और प्रभावी बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सांसदों की उपस्थिति दर्ज कराने के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब आगामी बजट सत्र से लोकसभा सांसद केवल अपनी निर्धारित सीटों से ही हाजिरी लगा सकेंगे। पहले उपलब्ध लॉबी से उपस्थिति दर्ज कराने की सुविधा को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है।
लोकसभा अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य सांसदों को केवल संसद परिसर में मौजूद रहने तक सीमित न रखकर, सदन की कार्यवाही में सक्रिय और गंभीर भागीदारी के लिए प्रेरित करना है।
सदन चलने पर ही दर्ज होगी उपस्थिति
लखनऊ में आयोजित 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन के दौरान पत्रकारों से बातचीत में ओम बिरला ने कहा कि अब सांसद केवल उसी समय अपनी उपस्थिति दर्ज करा सकेंगे, जब सदन की कार्यवाही चल रही होगी। यदि किसी कारणवश सदन स्थगित हो जाता है—चाहे वह हंगामे की वजह से ही क्यों न हो—तो उस दौरान उपस्थिति दर्ज नहीं की जा सकेगी।
उन्होंने बताया कि यह नई व्यवस्था 28 जनवरी से शुरू होने वाले बजट सत्र से लागू की जाएगी।
तकनीक से सशक्त होगा संसद तंत्र
स्पीकर ने जानकारी दी कि लोकसभा में प्रत्येक सांसद की सीट पर विशेष डिजिटल कंसोल लगाए गए हैं, जिनके माध्यम से वे अपनी उपस्थिति दर्ज कर सकेंगे। इससे यह सुनिश्चित होगा कि सांसदों की हाजिरी केवल औपचारिकता न रहकर, सदन की कार्यवाही में उनकी वास्तविक सहभागिता को दर्शाए।
ओम बिरला ने कहा कि यह सुधार संसद की कार्यप्रणाली को आधुनिक बनाने और विधायी सत्रों की उत्पादकता बढ़ाने के व्यापक प्रयासों का हिस्सा है।
देशभर की विधानसभाओं में एकरूपता पर विचार
सम्मेलन को संबोधित करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ने बताया कि संसद ने एक समिति का गठन किया है, जो देश की सभी विधायी संस्थाओं में नियमों और परंपराओं में एकरूपता लाने के उपायों पर विचार करेगी। उन्होंने राज्य विधानसभाओं के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को लोकतंत्र के लिए सकारात्मक बताया।
उत्तर प्रदेश विधानसभा को जीवंत लोकतंत्र का उदाहरण बताते हुए बिरला ने कहा कि यदि प्रतिनिधि गंभीर चर्चा, संवाद और जिम्मेदारी के साथ अपनी भूमिका निभाएं, तो लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति जनता का विश्वास और मजबूत होगा।
लोकसभा में उपस्थिति नियमों में किया गया यह बदलाव न केवल संसदीय अनुशासन को सुदृढ़ करेगा, बल्कि सांसदों की जवाबदेही और सदन की गरिमा को भी नई मजबूती प्रदान करेगा।