
लंदन।
ऑस्ट्रेलिया के बाद अब ब्रिटेन भी बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने की दिशा में कदम बढ़ा सकता है। सरकारी सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ब्रिटेन की सरकार यह अध्ययन कर रही है कि क्या कम उम्र के बच्चों के लिए Facebook, Instagram जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर रोक लगाना प्रभावी साबित होगा।
गौरतलब है कि ऑस्ट्रेलिया हाल ही में 6 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन लागू करने वाला दुनिया का पहला देश बना है। इसी मॉडल को ध्यान में रखते हुए अब ब्रिटेन भी सख्त फैसले की तैयारी में है।
क्या करने जा रही है ब्रिटिश सरकार?
यूके सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह कई विकल्पों पर विचार कर रही है। इनमें प्रमुख हैं—
- डिजिटल सहमति की उम्र बढ़ाना, जो फिलहाल 13 साल है
- बच्चों के लिए फोन कर्फ्यू लागू करना, ताकि मोबाइल का अत्यधिक इस्तेमाल रोका जा सके
- लगातार स्क्रॉल (स्ट्रीक्स) और नशे की तरह लत लगाने वाले फीचर्स पर प्रतिबंध
- उम्र सत्यापन (Age Verification) को और सख्त बनाना, ताकि बच्चे फर्जी अकाउंट न बना सकें
इन उपायों को समझने के लिए ब्रिटेन के मंत्री ऑस्ट्रेलिया का दौरा भी करेंगे और वहां लागू नियमों का अध्ययन करेंगे।
क्यों जरूरी समझा जा रहा है यह कदम?
हाल ही में एलन मस्क की कंपनी के Grok AI चैटबॉट द्वारा बिना सहमति के अश्लील तस्वीरें बनाए जाने का मामला सामने आया था, जिसमें नाबालिगों से जुड़ा आपत्तिजनक कंटेंट भी शामिल था। इस घटना ने दुनियाभर में चिंता बढ़ा दी है।
ब्रिटेन सरकार अब उन AI टूल्स पर पूरी तरह बैन लगाने की तैयारी में है, जो कपड़े हटाकर न्यूड तस्वीरें बनाते हैं। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि बच्चे न तो अश्लील तस्वीरें बना सकें, न साझा कर सकें और न ही देख सकें।
राजनीतिक सहमति के संकेत
इस मुद्दे पर ब्रिटेन में राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। विपक्ष की नेता केमी बेडेनोच ने कहा है कि अगर उनकी पार्टी सत्ता में होती तो 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर पहले ही प्रतिबंध लगाया जा चुका होता। उन्होंने प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर पर इस फैसले में देरी करने का आरोप लगाया।
हालांकि, सरकार और विपक्ष—दोनों के रुख से यह साफ है कि बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर ब्रिटेन में व्यापक सहमति बन रही है।
निष्कर्ष
अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो ब्रिटेन ऑस्ट्रेलिया के बाद बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर सख्ती करने वाला दूसरा बड़ा देश बन सकता है। यह फैसला न सिर्फ सोशल मीडिया कंपनियों के लिए चुनौती होगा, बल्कि दुनिया भर में डिजिटल नियमों को लेकर नई बहस भी छेड़ सकता है।