
सतना (एमपी): आमतौर पर जेल में बंद कैदी और उनके परिजन जमानत पाने के लिए बेचैन रहते हैं, लेकिन सतना सेंट्रल जेल में उल्टा मामला सामने आया है। यहां हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद भी 5 कैदी सलाखों के पीछे रहने को मजबूर हैं। जेल प्रशासन के अनुसार, उनके परिजन बेल-बॉन्ड भरने को तैयार नहीं हैं।
जमानत मिलने के बाद भी कैदी बाहर नहीं
सेंट्रल जेल प्रशासन ने बताया कि अलग-अलग गंभीर मामलों में सजा काट रहे इन 5 बंदियों को उच्च न्यायालय से जमानत मिल चुकी है। नियम के अनुसार जमानत के बाद परिजनों को बेल-बॉन्ड भरना होता है, तभी रिहाई संभव है। जेल विभाग बार-बार परिजनों से संपर्क कर रहा है और रिहाई की पेशकश कर रहा है, लेकिन परिवारों की बेरुखी के कारण कैदी बाहर नहीं आ पा रहे हैं।
कैदियों के गंभीर अपराध
जिन 5 कैदियों को जमानत मिली है, उनके खिलाफ हत्या, बलात्कार, पॉक्सो और शासकीय कर्मचारी पर हमला जैसे गंभीर आरोप हैं। इनमें शामिल हैं:
रायसेन का रामकीर्तन दास (धारा 377)
पन्ना का इमाम खान (धारा 302)
बिहार का गणेश शर्मा (POSCO एक्ट)
सतना का राजा भैया डोहर (धारा 332 व 333)
पन्ना का नत्थूलाल प्रजापति (धारा 302)
जेल प्रशासन का प्रयास जारी
उप जेल अधीक्षक सोनवीर सिंह कुशवाहा ने बताया कि जेल प्रशासन लगातार परिजनों से संपर्क कर समझा रहा है कि वे बेल-बॉन्ड भरकर कैदियों को बाहर निकालें। हालांकि, कुछ परिवार आर्थिक स्थिति या अपराध की गंभीरता के कारण जमानत करवाने में हिचकिचा रहे हैं। जेल प्रशासन का कहना है कि बंदियों का पुनर्वास उनकी जिम्मेदारी है और प्रशासन कोशिश कर रहा है कि जल्दी से जल्दी ये कैदी अपनी जमानत का लाभ उठा सकें।