
पटना: बिहार में शराबबंदी कानून से जुड़े मामलों में पटना हाईकोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए एक ही दिन में 463 लोगों को जमानत दी। न्यायमूर्ति रुद्र प्रकाश मिश्रा की एकल पीठ ने अधिकारियों द्वारा कानून के खराब क्रियान्वयन पर चिंता जताई और मामूली मात्रा में शराब मिलने पर जेल भेजने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए।
कोर्ट ने कहा कि शराबबंदी कानून का सही ढंग से लागू न होना जेलों में आरोपियों की भारी संख्या और न्यायपालिका पर अनावश्यक बोझ का मुख्य कारण है। जस्टिस मिश्रा ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि छोटे-छोटे मामलों में भी लोगों को लंबे समय तक सलाखों के पीछे रखना चिंता का विषय है।
पुराना रिकॉर्ड टूटा
सुनवाई के दौरान अदालत ने 463 जमानत याचिकाएं मंजूर कर अपना पिछला रिकॉर्ड (जो करीब 300 था) तोड़ दिया। अदालत ने कहा कि इस फैसले से स्पष्ट संदेश गया है कि कानून का बोझ आम जनता और न्यायपालिका पर संतुलित होना चाहिए।
सरकारी वकीलों की तारीफ
अदालत ने सहायक लोक अभियोजकों (APP) और सरकारी वकीलों के प्रयासों की जमकर सराहना की। रेणु कुमारी, वीणा कुमारी और नित्यानंद मिश्रा सहित वकीलों ने प्रत्येक आरोपी के आपराधिक इतिहास और जेल में बिताई गई अवधि जैसी जानकारियां पेश कीं। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष के सहयोग से ही मामलों का निपटारा ‘तूफानी गति’ से संभव हो सका।
संदेश:
पटना हाईकोर्ट का यह फैसला कानून के जमीनी क्रियान्वयन और जेल भेजने की नीतियों पर गंभीर टिप्पणी है। अदालत ने कहा कि मामूली शराब की बरामदगी पर भी लोगों को जेल में रखना चिंताजनक है और कानून का असर आम जनता पर संतुलित होना चाहिए।