Tuesday, January 20

प्रयागराज माघ मेला: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस, शंकराचार्य पद पर सवाल

 

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प्रयागराज: ज्योतिषपीठ शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को प्रयागराज माघ मेला प्रशासन की ओर से नोटिस जारी किया गया है। नोटिस में उनसे शंकराचार्य पद का उपयोग करने को लेकर स्पष्ट जवाब मांगा गया है। यह विवाद मौनी अमावस्या के संगम स्नान के समय पालकी में जाने के मुद्दे पर उत्पन्न हुआ।

 

नोटिस में क्या कहा गया?

 

माघ मेला प्राधिकरण के उपाध्यक्ष की ओर से नोटिस में सुप्रीम कोर्ट में चल रहे अपील संख्या 3010/2020 और 3011/2020 का हवाला दिया गया। इसमें कहा गया कि किसी भी धर्माचार्य को शंकराचार्य के रूप में पट्टाभिषेकित नहीं किया गया है, और सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को अपने नाम के आगे शंकराचार्य शब्द के प्रयोग के संबंध में 24 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण देना होगा।

 

मेलाधिकारी ऋषिराज ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने 14 अक्टूबर 2022 को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को शंकराचार्य के प्रोटोकॉल पर रोक लगाई थी। इस कारण माघ मेला में उन्हें ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य के रूप में नहीं, बल्कि बद्रिका आश्रम सेवा शिविर के तहत ही जमीन आवंटित की गई थी।

 

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का पक्ष

 

स्वामी ने स्पष्ट किया कि शंकराचार्य का निर्णय प्रशासन नहीं करता। उन्होंने कहा कि तीन अन्य पीठों के शंकराचार्यों ने उन्हें शंकराचार्य मान्यता दी है, और पिछले माघ मेला में वे संगम स्नान में शामिल हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि वे मेला प्रशासन द्वारा निर्धारित जगह पर ही बैठे थे, न कि धरने या अनशन पर।

 

स्वामी ने प्रशासन से क्षमा याचना और संगम स्नान की अनुमति देने की मांग की। उन्होंने यह भी कहा कि उनके शिष्यों ने बैरिकेडिंग नहीं तोड़ी, बल्कि सरकारी कर्मचारी उन्हें स्नान स्थल तक ले गए थे।

 

प्रशासन का दावा

 

माघ मेला प्रशासन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि स्वामी को संगम स्नान से नहीं रोका गया। उन्हें वाहन से उतरकर पैदल जाने का अनुरोध किया गया, लेकिन वे अपनी जिद पर अड़े रहे। अत्यधिक भीड़ और सुरक्षा के कारण पूर्व में दो वाहनों की अनुमति नहीं दी गई थी।

 

इस विवाद के बीच, प्रयागराज माघ मेला प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश और सुरक्षा नियमों के पालन को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट की है।

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