
नोएडा: सेक्टर-150 में शुक्रवार रात हुए हादसे में 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत ने पूरे शहर को झकझोर दिया है। युवराज की मौत को लेकर नोएडा अथॉरिटी और प्रशासन की लापरवाही पर सवाल उठ रहे हैं। घटना के बाद यूपी सरकार ने नोएडा अथॉरिटी के सीईओ डॉ. लोकेश एम को हटा दिया और मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय SIT गठित की गई है।
- शुक्रवार रात की घटना
युवराज मेहता की कार सड़क किनारे खोदे गए पानी से भरे गड्ढ़े में चली गई। कोहरे और अंधेरे में कार अनियंत्रित हो गई। युवराज ने मदद के लिए मोबाइल टॉर्च जलाकर चिल्लाया, लेकिन पुलिस और आसपास मौजूद लोगों ने उन्हें बचाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
- पुलिस का बयान
पुलिस और फायर ब्रिगेड ने मदद की कोशिश की, लेकिन युवराज को बचाया नहीं जा सका। युवराज के पिता राज मेहता ने आरोप लगाया कि दो घंटे तक उनका बेटा जीवन-मौत से लड़ता रहा, लेकिन प्रशासन और लोग तमाशबीन बने रहे। नोएडा अथॉरिटी के जीएम एसपी सिंह ने कहा कि सेक्टर-150 में रोड सेफ्टी से संबंधित सभी जरूरी काम जल्द करवाए जाएंगे।
- मामला दर्ज
युवराज की मौत के मामले में पीड़ित परिवार की शिकायत पर बिल्डर के खिलाफ केस दर्ज किया गया। डीसीपी ग्रेटर नोएडा शाद मियां खान ने बताया कि मौके पर विजिबिलिटी बहुत कम थी और कई लोग पानी में उतरकर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने के बावजूद युवराज को बचा नहीं सके।
- विरोध प्रदर्शन
युवराज की मौत के बाद नोएडा में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। नागरिकों ने नोएडा अथॉरिटी और पुलिस की लापरवाही का आरोप लगाते हुए न्याय की मांग की। कई जगह कैंडल मार्च और ‘युवराज को न्याय दो’ के नारे लगाए गए।
- अथॉरिटी सीईओ हटाए गए
यूपी सरकार ने मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए नोएडा अथॉरिटी के सीईओ डॉ. लोकेश एम को हटा दिया। साथ ही तीन सदस्यीय SIT गठित कर मामले की जांच का आदेश दिया गया। इस कदम को प्रशासन और सरकार की ओर से बड़े एक्शन के रूप में देखा जा रहा है।
युवराज मेहता की मौत ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और न्याय दिलाने की मांग जोर पकड़ रही है।