Wednesday, June 3

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महाराष्ट्र की लाडली बहन योजना: 1 करोड़ महिलाएं हो सकती हैं बाहर, ई-केवाईसी को लेकर पेच फंसा

मुंबई: महाराष्ट्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना “लाडली बहन” के तहत 1 करोड़ से ज्यादा लाभार्थियों के लिए ई-केवाईसी प्रक्रिया अब भी पूरी नहीं हो पाई है। आगामी 18 नवंबर तक ई-केवाईसी की अंतिम तिथि निर्धारित की गई है, लेकिन अब तक केवल 1.3 करोड़ महिलाओं ने इस प्रक्रिया को पूरा किया है। महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों के अनुसार, योजना में कुल 2.35 करोड़ लाभार्थी पंजीकृत हैं, जिनमें से बड़ी संख्या अब भी ई-केवाईसी नहीं करा पाई हैं।

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ई-केवाईसी में क्यों फंसा पेच?

ई-केवाईसी प्रक्रिया को लेकर कई महिलाओं को कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है, खासकर उन महिलाओं के लिए जिनके पति या पिता का निधन हो चुका है। इन्हें दस्तावेजों को अपडेट करने में समस्याएं आ रही हैं। शुरुआत में ई-केवाईसी की प्रक्रिया में कई तकनीकी अड़चनें आई थीं, लेकिन बाद में इसे सुचारू रूप से चलाने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए। हालांकि, अब भी लाखों महिलाओं के विवरण अपडेट नहीं हो पाए हैं, और अगर 18 नवंबर तक ई-केवाईसी पूरा नहीं होता, तो उन्हें इस योजना से बाहर किया जा सकता है।

योजना का पंजीकरण और लाभार्थियों की संख्या

इस योजना में पहले करीब 2.5 करोड़ महिलाओं का पंजीकरण हुआ था, लेकिन भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते बड़ी संख्या में महिलाओं के नाम सूची से हटा दिए गए थे। इसके बाद, योजना में सुधार के लिए ई-केवाईसी प्रक्रिया शुरू की गई थी। हालांकि, कई महिलाएं अब भी इस प्रक्रिया में शामिल नहीं हो पाई हैं, और उन्हें योजना से बाहर होने का खतरा है।

सरकार का रुख और आगामी चुनाव

महाराष्ट्र में आगामी स्थानीय निकाय चुनाव और महानगरपालिका चुनाव के मद्देनजर सरकार ने फिलहाल लाडली बहन योजना के लाभार्थियों को लेकर कड़ा रुख अपनाने की बजाय राहत देने की नीति अपनाई है। महायुति के कुछ नेता भी अब महिलाओं को ई-केवाईसी करने में मदद देने के लिए रजिस्ट्रेशन काउंटर लगा रहे हैं। हाल ही में, बीजेपी ने मुंबई में ‘बहन लाडल, भाऊबीज देवाभाऊ की’ अभियान चलाया था, जिसमें महिलाओं से सीधा संपर्क किया गया था।

क्या होगा आगे?

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में एनडीए की सफलता के बाद लाडली बहन योजना को एक अहम पहलू माना गया है। हालांकि, कुछ नेता महिलाओं को दिए जाने वाले मासिक धनराशि को बढ़ाने का वादा कर रहे हैं। महायुति के घोषणापत्र में महिलाओं को 1,500 रुपये की राशि देने का वादा किया गया था, लेकिन अब तक यह वादा पूरा नहीं हो पाया है। आने वाले स्थानीय निकाय चुनावों और बजट सत्र में इन योजनाओं के लिए कितनी धनराशि आवंटित की जाती है, यह इस योजना के भविष्य को तय करेगा।

इस योजना की सफलता अब इस बात पर निर्भर करती है कि सरकार कितनी जल्दी ई-केवाईसी को पूरा करवा पाती है और कितनी महिलाओं को इस योजना से बाहर होने से बचाया जा सकता है।

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