
नई दिल्ली: क्या मेट्रो स्टेशन के पास रहने से आपके होम लोन की मासिक किस्त यानी ईएमआई पर असर पड़ सकता है? एक नई रिसर्च रिपोर्ट में इस सवाल का जवाब हाँ में दिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, मेट्रो कनेक्टिविटी से आने-जाने का खर्च कम होता है, जिससे परिवारों की वित्तीय स्थिति मजबूत होती है और ईएमआई का बोझ हल्का हो जाता है।
प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) के एक हालिया वर्किंग पेपर में यह बात सामने आई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले एक दशक में भारत में मेट्रो नेटवर्क का तेजी से विस्तार, लोगों की निजी वाहन पर निर्भरता घटाने में मददगार साबित हुआ है। इससे आने-जाने का खर्च कम हुआ और परिवारों ने होम लोन जैसे बड़े वित्तीय खर्चों के भुगतान में अधिक अनुशासन दिखाया।
रिपोर्ट के लेखक सौम्या कांति घोष, पुलक घोष और भारतीय स्टेट बैंक की अर्थशास्त्री फाल्गुनी सिन्हा ने बताया कि बेहतर और तेज सार्वजनिक परिवहन सुविधाएँ परिवारों की आर्थिक स्थिरता को बढ़ाती हैं। जब लोगों को भरोसेमंद मेट्रो जैसी सुविधा मिलती है, तो वे निजी वाहनों पर कम निर्भर रहते हैं। इसके परिणामस्वरूप वाहन खरीद, पेट्रोल-डीजल, इंश्योरेंस, मेंटेनेंस और पार्किंग जैसे खर्च घटते हैं।
इससे परिवारों के हाथ में अधिक नकदी रहती है, जिससे समय पर ईएमआई चुकाना आसान हो जाता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह केवल व्यक्तिगत परिवारों के लिए लाभकारी नहीं है, बल्कि शहरी वित्तीय स्थिरता और व्यापक आर्थिक मजबूती में भी योगदान देता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, मेट्रो जैसी सुविधाओं के कारण आने-जाने की लागत कम होना, शहरी परिवारों के लिए सबसे बड़े निश्चित खर्च यानी होम लोन की ईएमआई पर सकारात्मक प्रभाव डालता है।